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चंडीगढ़ में नया रेंट कंट्रोल एक्ट लागू: सभी एग्रीमेंट का पंजीकरण अनिवार्य, 60 दिन में विवाद निपटारे का दावा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 14 May 2026 11:34 AM IST
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सार

डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में मॉडल टेनेंसी एक्ट तैयार किया था जिसके बाद देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे लागू किया है। अब तक 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कानून लागू हो चुका है।

New Rent Control Act Implemented in Chandigarh Registration of All rent Agreements Mandatory
house rent agreement - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में किरायेदारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए असम टेनेंसी एक्ट 2021 को लागू कर दिया है। 

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यह कानून 6 मई से प्रभावी हो गया है। इसके लागू होते ही लंबे समय से प्रभाव में रहा ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रिस्टि्रक्शन एक्ट-1949 समाप्त हो गया है।

नए कानून के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच होने वाले सभी रेंट एग्रीमेंट का पंजीकरण अब अनिवार्य कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने डीसी निशांत कुमार यादव के निर्देश पर रेंट एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल यह प्रक्रिया ऑफलाइन मोड में डीसी कार्यालय में चल रही है। लोगों की सुविधा के लिए डीसी ऑफिस के ग्राउंड फ्लोर पर विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है।

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ऑनलाइन पोर्टल जल्द होगा शुरू

डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में मॉडल टेनेंसी एक्ट तैयार किया था जिसके बाद देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे लागू किया है। अब तक 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कानून लागू हो चुका है जिनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, अंडमान एवं निकोबार, दादर एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव, जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप शामिल हैं।


इसी क्रम में चंडीगढ़ प्रशासन ने भी असम टेनेंसी एक्ट 2021 को अपनाया है। प्रशासन ने कहा है कि जल्द ही एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा जिसके माध्यम से मकान मालिक और किरायेदार रेंट एग्रीमेंट का डिजिटल पंजीकरण कर सकेंगे। यह पोर्टल अगले एक महीने के भीतर शुरू होने की संभावना है। तब तक नागरिक ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

किरायेदारी विवादों का 60 दिन में निपटारा

नए कानून के लागू होने के बाद किरायेदारी से जुड़े कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब कोई भी मकान मालिक मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकेगा। किराया वृद्धि और अन्य शर्तों के लिए दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट लिखित समझौता अनिवार्य होगा।

इससे किरायेदारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और विवादों की संभावना कम होगी। किरायेदारी विवादों के समाधान के लिए रेंट कंट्रोल अथॉरिटी और रेंट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। इन मामलों की सुनवाई जिला स्तर के न्यायिक अधिकारियों की ओर से की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि सभी शिकायतों का निपटारा 60 दिनों के भीतर किया जाएगा। नए एक्ट के तहत उन मकान मालिकों को भी राहत मिलेगी जिनकी संपत्तियों पर किरायेदार अवैध कब्जा कर लेते थे।

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