{"_id":"58b1d92c4f1c1bdf21b22e83","slug":"tagore-theatre-chandigarh-event-sector-18-kala-pani","type":"story","status":"publish","title_hn":"गाथा वीर सावरकर की, टैगोर में 'काला पानी' नाटक का मंचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गाथा वीर सावरकर की, टैगोर में 'काला पानी' नाटक का मंचन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 26 Feb 2017 12:51 AM IST
विज्ञापन
टैगोर में 'काला पानी' नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद थिएटर ग्रुप की ओर से काला पानी नाटक का मंचन सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में किया गया। नाटक में क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर का देश की आजादी के लिए किए गए संघर्ष को दिखाया गया है। नाटक का लेखन राजेश आत्रेय और निर्देशन मुकेश शर्मा ने किया।
कलाकारों ने नाटक के माध्यम से क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन संघर्ष को प्रदर्शित किया गया। नाटक में दिखाया गया कि वीर सावरकर बैरिस्ट्री की पढ़ाई के लिए लंदन चले जाते हैं। भारत को आजाद करवाने के लिए लंदन से ही लड़ाई लड़ते हैं। सावरकर के विचारों से प्रेरित होकर मदन लाल ढींगरा सरेआम कर्जन वायली की हत्या कर देते हैं। कर्जन वायली लंदन में भारतीय क्रांतिकारियों की हर गतिविधि की खबर भारत भेजता था। इस कारण क्रांतिकारियों के परिवाराें को अनेक प्रकार की प्रताड़नाएं सहन करनी पड़ती हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर वीर सावरकर की लिखित पुस्तक को छपवाने के लिए जब उनके बडे़ भाई बाबा राव जाते हैं तो इसकी भनक ब्रिटिश अधिकारियों को लग जाती है। अंग्रेज सिपाही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज देते हैं। वहीं सावरकर की पत्नी और भाभी को उनके घर से निकाल दिया जाता हैं। सावरकर के ससुर की नौकरी भी छीन ली जाती हैं।
इसके बाद पेरिस से लंदन आते वक्त वीर सावरकर को भी गिरफ्तार कर लिया जाता हैं। अंग्रेज जब सावरकर को समुद्री रास्ते से भारत लाने की तैयारी कर रहे होते हैं तब वीर सावरकर अंग्र्रेजों को चकमा देकर समुद्री जहाज से कूद कर बच निकलते हैं। इस जुर्म के लिए उन्हें दो बार कालापानी की सजा दी जाती है। कालापानी की सजा के दौरान पोर्ट ऑफ ब्लेयर की जेल में 10 वर्षों के कठोर कारावास के उपरांत उन्हें नासिक के एक घर में नजरबंद कर दिया जाता है। सावरकर देश की आजादी के लिए संघर्ष करने के साथ ही सभी वर्गों के लोगों को एक साथ रहने और छुआछूत खत्म करने के लिए प्रेरित करते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
कलाकारों ने नाटक के माध्यम से क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन संघर्ष को प्रदर्शित किया गया। नाटक में दिखाया गया कि वीर सावरकर बैरिस्ट्री की पढ़ाई के लिए लंदन चले जाते हैं। भारत को आजाद करवाने के लिए लंदन से ही लड़ाई लड़ते हैं। सावरकर के विचारों से प्रेरित होकर मदन लाल ढींगरा सरेआम कर्जन वायली की हत्या कर देते हैं। कर्जन वायली लंदन में भारतीय क्रांतिकारियों की हर गतिविधि की खबर भारत भेजता था। इस कारण क्रांतिकारियों के परिवाराें को अनेक प्रकार की प्रताड़नाएं सहन करनी पड़ती हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर वीर सावरकर की लिखित पुस्तक को छपवाने के लिए जब उनके बडे़ भाई बाबा राव जाते हैं तो इसकी भनक ब्रिटिश अधिकारियों को लग जाती है। अंग्रेज सिपाही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज देते हैं। वहीं सावरकर की पत्नी और भाभी को उनके घर से निकाल दिया जाता हैं। सावरकर के ससुर की नौकरी भी छीन ली जाती हैं।
विज्ञापन
इसके बाद पेरिस से लंदन आते वक्त वीर सावरकर को भी गिरफ्तार कर लिया जाता हैं। अंग्रेज जब सावरकर को समुद्री रास्ते से भारत लाने की तैयारी कर रहे होते हैं तब वीर सावरकर अंग्र्रेजों को चकमा देकर समुद्री जहाज से कूद कर बच निकलते हैं। इस जुर्म के लिए उन्हें दो बार कालापानी की सजा दी जाती है। कालापानी की सजा के दौरान पोर्ट ऑफ ब्लेयर की जेल में 10 वर्षों के कठोर कारावास के उपरांत उन्हें नासिक के एक घर में नजरबंद कर दिया जाता है। सावरकर देश की आजादी के लिए संघर्ष करने के साथ ही सभी वर्गों के लोगों को एक साथ रहने और छुआछूत खत्म करने के लिए प्रेरित करते रहे।
विज्ञापन