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बेमेतरा में खाद की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन: उड़नदस्ता दल की छापेमारी में 275 बोरी यूरिया जब्त, नोटिस भी जारी
Sat, 04 Jul 2026 09:57 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Sat, 04 Jul 2026 09:57 PM IST
सार
Bemetara News: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध भंडारण के विरुद्ध सघन अभियान चला रही है।
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उड़नदस्ता दल की छापेमारी में 275 बोरी यूरिया जब्त
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
Bemetara News: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध भंडारण के विरुद्ध सघन अभियान चला रही है। इसी कड़ी में बेमेतरा जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से भंडारित 275 बोरी यूरिया जब्त किया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश और कृषि विभाग के उप संचालक मोरध्वज डडसेना के मार्गदर्शन में गठित जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल जिलेभर में लगातार औचक निरीक्षण और छापामार कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन का उद्देश्य यह कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो और कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर अनुचित लाभ कमाने के प्रयासों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अभियान के तहत प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर उड़नदस्ता दल ने ग्राम जानो, तहसील देवकर में अँजोर वर्मा के परिसर में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 275 बोरी यूरिया का अवैध भंडारण पाया गया। मौके पर संपूर्ण उर्वरक को विधिवत जब्त कर लिया गया और संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्राप्त जवाब के परीक्षण के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग ने जब्त किए गए उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को केवल मानक गुणवत्ता वाले उर्वरक ही उपलब्ध कराए जाएं और किसी भी प्रकार की मिलावट अथवा निम्न गुणवत्ता की सामग्री बाजार में न पहुंचे।
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जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, अवैध भंडारण तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। यदि कोई निजी कृषि केंद्र, उर्वरक विक्रेता अथवा सहकारी संस्था इस प्रकार की अनियमितता करते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में भी प्रस्तुत किया जाएगा।
कलेक्टरप्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन पूरे जिले में लगातार निगरानी कर रहा है और शिकायत प्राप्त होते ही बिना पूर्व सूचना के तत्काल जांच एवं छापामार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश में चल रही इस तरह की सतत कार्रवाई न केवल कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने में सहायक होगी, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत करेगी कि सरकार उनकी मेहनत, उनकी फसल और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा प्रत्येक शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
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प्रशासन का उद्देश्य यह कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो और कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर अनुचित लाभ कमाने के प्रयासों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अभियान के तहत प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर उड़नदस्ता दल ने ग्राम जानो, तहसील देवकर में अँजोर वर्मा के परिसर में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 275 बोरी यूरिया का अवैध भंडारण पाया गया। मौके पर संपूर्ण उर्वरक को विधिवत जब्त कर लिया गया और संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्राप्त जवाब के परीक्षण के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कृषि विभाग ने जब्त किए गए उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को केवल मानक गुणवत्ता वाले उर्वरक ही उपलब्ध कराए जाएं और किसी भी प्रकार की मिलावट अथवा निम्न गुणवत्ता की सामग्री बाजार में न पहुंचे।
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जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, अवैध भंडारण तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। यदि कोई निजी कृषि केंद्र, उर्वरक विक्रेता अथवा सहकारी संस्था इस प्रकार की अनियमितता करते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में भी प्रस्तुत किया जाएगा।
कलेक्टरप्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन पूरे जिले में लगातार निगरानी कर रहा है और शिकायत प्राप्त होते ही बिना पूर्व सूचना के तत्काल जांच एवं छापामार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश में चल रही इस तरह की सतत कार्रवाई न केवल कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने में सहायक होगी, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत करेगी कि सरकार उनकी मेहनत, उनकी फसल और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा प्रत्येक शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।