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Ambikapur: अंबिकापुर में छिपा था वासेपुर का खूंखार गैंगस्टर, दबिश पड़ते ही पुलिस को चकमा देकर फरार

Fri, 03 Jul 2026 07:46 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर Published by: अंबिकापुर ब्यूरो Updated Fri, 03 Jul 2026 07:46 PM IST
सार

झारखंड के चर्चित वासेपुर गैंगवार से जुड़ा फरार गैंगस्टर सब्बीर आलम कई वर्षों से अंबिकापुर में पहचान छिपाकर रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए झारखंड के धनबाद से पहुंची पुलिस ने शहर के रिंग रोड इलाके में दबिश दी।

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notorious gangster from Wasseypur was hiding in Ambikapur
फरार आरोपी की फोटो।

विस्तार

झारखंड के चर्चित वासेपुर गैंगवार से जुड़ा फरार गैंगस्टर सब्बीर आलम कई वर्षों से अंबिकापुर में पहचान छिपाकर रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए झारखंड के धनबाद से पहुंची पुलिस ने शहर के रिंग रोड इलाके में दबिश दी, लेकिन कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस घटनाक्रम के बाद न केवल पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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जानकारी के मुताबिक, सब्बीर आलम वर्ष 2001 में धनबाद के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। आरोप है कि उसने अपने भाई शाहीद आलम और अन्य साथियों के साथ मिलकर 18 अक्टूबर 2001 को वासेपुर के कुख्यात डॉन फहीम खान की मां नाजमा खातून और चाची शाहनाज खातून की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह वारदात धनबाद के डायमंड क्रॉसिंग के पास हुई थी और इसके पीछे वासेपुर के दो गैंगों की खूनी रंजिश बताई जाती है।
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हत्याकांड के बाद पुलिस ने सब्बीर आलम समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन वर्ष 2013 में झारखंड हाईकोर्ट में पेशी के दौरान वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया। तब से वह लगातार फरार चल रहा था। दूसरी ओर, इस मामले में उसके भाई शाहीद आलम सहित अन्य आरोपियों को वर्ष 2018 में धनबाद की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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सूत्रों के अनुसार, धनबाद पुलिस को हाल ही में सूचना मिली थी कि सब्बीर आलम अंबिकापुर में फर्जी पहचान के सहारे रह रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम सादे कपड़ों में शहर पहुंची और रिंग रोड क्षेत्र स्थित एक होटल के पास दबिश दी। हालांकि कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई और इसकी जानकारी पहले से सरगुजा पुलिस को नहीं दी गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सादे कपड़ों में पहुंचे लोगों को स्थानीय नागरिक पहचान नहीं सके, जिससे मौके पर विरोध की स्थिति बन गई। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर सब्बीर आलम वहां से भाग निकला। जब तक पुलिस स्थिति संभाल पाती, आरोपी आंखों से ओझल हो चुका था।

आरोपी के फरार होने के बाद धनबाद पुलिस ने सरगुजा पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस ने संयुक्त रूप से संभावित ठिकानों पर तलाश अभियान चलाया, लेकिन देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। सरगुजा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने बताया कि धनबाद पुलिस वारंटी की गिरफ्तारी के लिए अंबिकापुर आई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस को पहले इसकी सूचना नहीं दी गई। आरोपी के फरार होने के बाद संयुक्त प्रयास से उसकी तलाश की गई, परंतु सफलता नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।


गौरतलब है कि धनबाद का वासेपुर क्षेत्र वर्षों से गैंगवार, कोयला कारोबार और संगठित अपराध के कारण देशभर में चर्चा का विषय रहा है। इसी पृष्ठभूमि पर वर्ष 2012 में बनी चर्चित फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर ने इस इलाके की अपराध दुनिया को बड़े पर्दे पर दिखाया था। अब उसी गैंगवार से जुड़ा एक फरार आरोपी अंबिकापुर में छिपा मिला और पुलिस के हाथ से फिसल जाने की घटना ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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