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छत्तीसगढ़: मैनपाट में नाशपाती की खेती से किसान की बदली तस्वीर, एग्री-टूरिज्म से बढ़ी आय

Wed, 15 Jul 2026 07:58 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर Published by: अंबिकापुर ब्यूरो Updated Wed, 15 Jul 2026 07:58 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के मैनपाट में फलोद्यान और कृषि-पर्यटन ग्रामीणों के लिए आय का नया माध्यम बन रहे हैं। ग्राम बारिमा निवासी किसान मनोज यादव ने कुदारीडीह में नाशपाती का सफल बागान विकसित किया है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है और यह पर्यटकों का आकर्षण केंद्र भी बन गया है।

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Pear cultivation in Mainpat has transformed farmers lives
मैनपाट में नाशपाती की खेती से बदली किसान की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में फलोद्यान और एग्री-टूरिज्म ग्रामीणों के लिए आय का नया माध्यम बनकर उभर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से ग्राम बारिमा निवासी किसान मनोज यादव ने ग्राम कुदारीडीह (मेहता पॉइंट के पास) में नाशपाती का सफल बागान विकसित कर न केवल अच्छी आमदनी हासिल की है, बल्कि उनका बगीचा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बन गया है।
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मनोज यादव ने वर्ष 2017-18 में शासकीय उद्यान रोपणी कमलेश्वरपुर से नाशपाती के पौधे प्राप्त कर आधा हेक्टेयर भूमि में करीब 200 पौधे लगाए थे। प्राकृतिक कारणों से कुछ पौधे नष्ट हो गए, लेकिन वर्तमान में लगभग 170 पौधे फलदार हो चुके हैं। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और निरीक्षण से बागवानी को बेहतर बनाने में मदद मिली।
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इस वर्ष बागान से करीब 260 कैरेट नाशपाती का उत्पादन हुआ। थोक बिक्री से लगभग 1.30 लाख रुपये तथा फुटकर बिक्री से 25 से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई। इस तरह किसान को करीब 1.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। वहीं पिछले वर्ष अनुकूल मौसम के कारण इसी बागान से 2.5 से 3 लाख रुपये तक की कमाई हुई थी।
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मैनपाट में नाशपाती की खेती से बदली किसान की तस्वीर।


कुदारीडीह स्थित यह बागान अब एग्री-टूरिज्म का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। लालमाटी क्षेत्र में स्थित इस स्थान से रायगढ़ अंचल का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। प्रतिदिन 100 से 250 पर्यटक यहां पहुंचते हैं और ताजी नाशपाती खरीदने के साथ स्वयं पेड़ों से फल तोड़ने का अनुभव भी लेते हैं। इससे किसानों को अपनी उपज सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
 

मैनपाट में नाशपाती की खेती से बदली किसान की तस्वीर।


किसान मनोज यादव ने युवाओं और किसानों से पारंपरिक खेती के साथ नाशपाती, लीची सहित अन्य फलदार पौधों की बागवानी अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती, विभागीय सहयोग और पर्यटन से जुड़ाव के माध्यम से कम भूमि में भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग भी फलोद्यान विकास एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं।

 

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