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Chhattisgarh: मनरेगा की डबरी और समूह ऋण से बदली सविता की जिंदगी, मछली पालन व खेती से बनीं आत्मनिर्भर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
Published by: अंबिकापुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 05:50 PM IST
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सार
सरगुजा जिले में स्वयं सहायता समूह ‘रीमा’ की सदस्य सविता ने मनरेगा से बनी डबरी और बिहान योजना के 50 हजार रुपये ऋण की मदद से मछली पालन शुरू किया। सविता ने शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया है।
समूह ऋण से बदली सविता की तकदीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। अंबिकापुर की सविता ने मनरेगा और बिहान योजना से आत्मनिर्भरता हासिल की है। उन्होंने डबरी निर्माण, मछली पालन और खेती के जरिए यह मिसाल पेश की है।
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सविता ने करीब दो वर्ष पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत अपने खेत में डबरी बनवाई थी। प्रारंभ में इसका उद्देश्य जल संचयन था, लेकिन अब यही डबरी उनके लिए आय का प्रमुख साधन बन गई है। डबरी के माध्यम से वे एक ओर मछली पालन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर खेतों की सिंचाई भी सुचारू रूप से हो पा रही है। उनकी सफलता में स्वयं सहायता समूह ‘रीमा’ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने ‘रीमा’ समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर डबरी में मत्स्य बीज डाला।
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उचित देखभाल और मेहनत के परिणामस्वरूप उन्होंने लगभग डेढ़ लाख रुपये की मछलियां बेचीं। वर्तमान में भी उनकी डबरी में मछलियां तैयार हो रही हैं, जिससे आगामी समय में और अधिक आय की उम्मीद है। डबरी के पानी से सविता अब खेतों में साग-भाजी की खेती भी कर रही हैं।
डबरी से उपलब्ध पानी का उपयोग कर सविता अब खेतों में साग-भाजी की खेती भी कर रही हैं। इससे उनके परिवार को पौष्टिक आहार मिलने के साथ-साथ सब्जियों की बिक्री से अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है। यह ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। शासन की योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
सविता ने शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि मनरेगा से बनी डबरी और स्वयं सहायता समूह से मिले सहयोग ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है। अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण पहले से बेहतर तरीके से कर पा रही हैं। यह ग्रामीण विकास में सरकारी योजनाओं की सफलता को दर्शाता है।

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