Chhattisgarh: नए जनपद अध्यक्ष पर गिरी गाज, पार्टी ने किया निष्कासित, कांग्रेस का समर्थन एक बड़ा सवाल
जिले के गुरूर जनपद का चुनाव काफी दिलचस्प था। कुल 21 जनपद सदस्यों को मतदान करना था। पार्टी हालांकि सुभद्रा साहू का नाम ले रही थी। लेकिन जनपद सदस्यों के मन में सुनीता साहू का नाम था। ऐसा कहा जा सकता है जैसे पार्टी ने अपना प्रत्याशी थोप दिया था। क्योंकि उनके पति भाजपा के नेता हैं।
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जिले के जनपद पंचायत गुरूर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष को बड़ा झटका भाजपा ने दिया है। अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने का आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है, जबकि आज सोमवार को उनका शपथ ग्रहण है। भाजपा अब दो खेमों में बंटी हुई नजर आ रही है। बता दें एक नेता ईशा प्रकाश साहू की पत्नी सुभद्रा साहू को जनपद अध्यक्ष के लिए प्रत्याशी बनाया गया था। लेकिन सदस्यों ने सुनीता साहू को अपना समर्थन दिया। जिसके बाद विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई पार्टी दो भागों में बंटी हुई नजर आई। नव निर्वाचित अध्यक्ष को समर्थन और बधाई देने वालों को तुरंत व्हाट्सअप ग्रुप से निकाल दिया गया। 21 जनपद सदस्यों में से 11 ने सुनीता साहू को अपना समर्थन दिया तो वहीं 10 लोग सुभद्रा साहू के पक्ष में खड़े नजर आए, शायद कार्यकर्ता अब नए लोगों को अवसर देना चाहती है।
जानिए कैसा था वो चुनाव
जिले के गुरूर जनपद का चुनाव काफी दिलचस्प था। कुल 21 जनपद सदस्यों को मतदान करना था पार्टी हालांकि सुभद्रा साहू का नाम ले रही थी। लेकिन जनपद सदस्यों के मन में सुनीता साहू का नाम था। ऐसा कहा जा सकता है जैसे पार्टी ने अपना प्रत्याशी थोप दिया था, क्योंकि उनके पति भाजपा के नेता हैं। लेकिन सदस्यों ने सुनीता साहू को अपना बहुमत देकर जिताया है। ये इस चुनाव की पहली और सबसे बड़ी क्रॉस वोटिंग की घटना रही। जिसमें भाजपा ने भाजपा को ही हराया वहीं भाजपा ने कांग्रेस के समर्थन से सुनीता साहू के अध्यक्ष बनने की बात कही। लेकिन क्रॉस वोटिंग तो दोनों के लिए हुई। अब सवाल ये है कि कांग्रेस ने वोट किसको दिया। क्योंकि जिस जनपद क्षेत्र से सुभद्रा ईषाप्रकाश जीतकर आए। वहां कांग्रेस ने पहले ही उन्हें समर्थन देते हुए कहा कि प्रत्याशी नहीं उतारा था तो कांग्रेस समर्थन का ये मामला कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है।
दो खेमों में बंटी पार्टी
आपको बता दें कि जनपद पंचायत के उस चुनाव के बाद पार्टी दो भागों में बंटी हुई नजर आई। दरअसल एक खेमा सुनीता साहू के समर्थन में नजर आई तो दूसरा खेमा मायूस सुभद्रा साहू के समर्थन में बौखलाई हुई। शायद इससे पहले पार्टी ने इतना बड़ा फैसला इतनी तेजी से नहीं लिया है। वहीं सूत्र ये भी बताते हैं कि सुनीता साहू के पक्ष में एक बड़ी टीम जल्दी ही प्रदेश कार्यालय की ओर प्रस्थान कर सकती है।
दुर्गानंद साहू बने निर्विरोध उपाध्यक्ष
अध्यक्ष चुनाव में भले ही क्रॉस वोटिंग हुई लेकिन उपाध्यक्ष चुनाव में दुर्गानंद साहू निर्विरोध प्रत्याशी चुने गए और उन्होंने सफलता पूर्वक उपाध्यक्ष की कुर्सी हासिल की, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें हार माला पहनाकर कार्यालय में स्वागत किया तो वहीं सुनीता साहू को बागी कहते हुए छोड़ दिया था।