Balodabazar: पुलिस का 'ऑपरेशन विश्वास', शराब पीने, बैठने और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ एक्शन
जिला बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस द्वारा "आपरेशन विश्वास" के तहत अवैध गतिविधियों में लिप्त आरोपियों, शांति भंग करने वाले असामाजिक तत्वों एवं जुआ, सट्टा का संचालन करने वाले तथा अवैध रूप से शराब बिक्री करने वाले आरोपियों की धरपकड़ कार्यवाही लगातार जारी है।
विस्तार
जिला बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस द्वारा "आपरेशन विश्वास" के तहत अवैध गतिविधियों में लिप्त आरोपियों, शांति भंग करने वाले असामाजिक तत्वों एवं जुआ, सट्टा का संचालन करने वाले तथा अवैध रूप से शराब बिक्री करने वाले आरोपियों की धरपकड़ कार्यवाही लगातार जारी है। इसी क्रम में जिला बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस टीम द्वारा सायं के समय क्षेत्र अंतर्गत शराब भट्टी के पास अवैध रूप से चखना सेंटर का संचालन करने वाले, सडक मार्ग के किनारे स्थित होटल, ढाबा, ठेला आदि में पीने, बैठने की सुविधा उपलब्ध कराकर अवैध रूप से शराब पिलाने वाले कुल 08 आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही किया गया है। पकड़े गए सभी 08 आरोपियों के विरुद्ध आबकारी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत विधिवत करवाई किया गया है। इस दौरान थाना सिमगा द्वारा 05 एवं थाना कसडोल द्वारा 03 आरोपी के विरुद्ध कार्यवाही किया गया है।
आरोपियों के नाम
1. भोजराम केंवट उम्र 39 साल निवासी ग्राम कचलोन थाना सिमगा
2. घनश्याम ध्रुव उम्र 33 साल निवासी ग्राम कचलोन थाना सिमगा
3. देवनाथ साहु उम्र 40 साल निवासी ग्राम कचलोन थाना सिमगा
4. संजय उम्र 42 साल निवासी ग्राम कचलोन थाना सिमगा
5. बेदराम साहू उम्र 25 साल निवासी ग्राम दामाखेड़ा थाना सिमगा
6. फागू देवांगन उम्र 35 साल निवासी ग्राम कटगी थाना कसडोल
7. नोहर देवांगन उम्र 36 साल निवासी ग्राम कटगी थाना कसडोल
8. राजेश साहू निवासी ग्राम लखमईसती थाना कसडोल
यह समाचार जिले में शराब से संबंधित अवैध गतिविधियों पर पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण है। पुलिस ने "आपरेशन विश्वास" के तहत होटल, ढाबा, ठेला, और चखना सेंटर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की है, जो अवैध रूप से शराब पिलाने और शराब की अन्य सुविधाएं प्रदान कर रहे थे। हालांकि, कुछ सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस केवल छोटे-छोटे आरोपियों को ही पकड़ रही है, जबकि मुख्य शराब माफिया और उनके गुर्गे जो शराब की पेटियां सप्लाई कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े माफिया और उनके नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियां अक्सर छिपी रहती हैं और पुलिस कार्रवाई के बावजूद इन्हें पकड़ पाना कठिन होता है। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई छोटे स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे शराब की अवैध आपूर्ति पर नियंत्रण पाया जा सकता है और समाज में शराब के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सकती है।
इस प्रकार की कार्रवाई में शायद माफिया के बड़े सदस्यों पर सीधे आरोप सिद्ध करने में समय लगता है, लेकिन पुलिस की यह लगातार कोशिश है कि वे इस जघन्य अपराध को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं।