{"_id":"6a6c6e410423d001320c27de","slug":"mastermind-behind-rs1456-million-bank-scam-arrested-from-tamil-nadu-fake-loans-forged-documents-and-middlemens-network-caused-massive-loss-to-indian-overseas-bank-bemetara-news-c-1-1-noi1482-4560871-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"CG News: 14.56 करोड़ के IOB बैंक घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, तमिलनाडु से पकड़कर बेमेतरा लाई पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CG News: 14.56 करोड़ के IOB बैंक घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, तमिलनाडु से पकड़कर बेमेतरा लाई पुलिस
Fri, 31 Jul 2026 03:51 PM IST
बेमेतरा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतरा
अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतरा
Published by: बेमेतरा ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2026 03:51 PM IST
सार
बेमेतरा के बहुचर्चित 14.56 करोड़ रुपये के आईओबी बैंक घोटाले में पुलिस ने मुख्य आरोपी और तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी ऋण स्वीकृति, अनधिकृत धन अंतरण और बैंकिंग नियमों के गंभीर उल्लंघन का खुलासा हुआ है।
विज्ञापन
एसपी ऑफिस में प्रेस कांफ्रेंस लेकर खुलासा किया
- फोटो : credit
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) की बेमेतरा शाखा में करीब 14 करोड़ 56 लाख 9 हजार 693 रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में सिटी कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को तमिलनाडु के तंजावुर से ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरा लाया गया। वर्तमान में वह आईओबी के क्षेत्रीय कार्यालय, तंजावुर में पदस्थ था।
इस मामले का खुलासा शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में तत्कालीन शाखा प्रबंधक रज्जू पाटनवार की शिकायत और बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
जांच में सामने आया कि विनीत दास ने बिचौलियों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर बैंकिंग नियमों की अनदेखी करते हुए फर्जी ऋण स्वीकृत किए। इसके अलावा खातों के बीच अनधिकृत धन अंतरण कर बैंक को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया। मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया था।
विज्ञापन
पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण में पहले ही कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
बैंक की आंतरिक जांच में 180 ऋण खातों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि कई ऐसे लोगों और संस्थाओं के नाम पर ऋण स्वीकृत किए गए जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था या जिनकी इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी थीं। स्वयं सहायता समूहों के नियमों का उल्लंघन कर जरूरत से अधिक ऋण वितरित किए गए। कई खातों से ग्राहकों की अनुमति और हस्ताक्षर के बिना रकम स्थानांतरित करने और नकद निकासी के भी प्रमाण मिले।
इसके अलावा कृषि यंत्र, मत्स्य पालन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजनाओं के तहत पात्रता की जांच किए बिना ऋण स्वीकृत करने, फर्जी जीएसटी नंबर वाले सप्लायरों के जरिए भुगतान करने, बिना वैध मूल्यांकन और कानूनी राय के ऋण मंजूर करने तथा सरकारी भूमि पर भी ऋण सीमा स्वीकृत करने जैसी गंभीर अनियमितताएं जांच में उजागर हुई हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने बैंकिंग प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया। फिलहाल विनीत दास से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां अब पूरे फर्जी ऋण नेटवर्क, अन्य संभावित आरोपियों और घोटाले की राशि के उपयोग की भी विस्तृत जांच कर रही हैं।
विज्ञापन
इस मामले का खुलासा शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में तत्कालीन शाखा प्रबंधक रज्जू पाटनवार की शिकायत और बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
विज्ञापन
जांच में सामने आया कि विनीत दास ने बिचौलियों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर बैंकिंग नियमों की अनदेखी करते हुए फर्जी ऋण स्वीकृत किए। इसके अलावा खातों के बीच अनधिकृत धन अंतरण कर बैंक को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया। मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया था।
विज्ञापन
पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण में पहले ही कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
बैंक की आंतरिक जांच में 180 ऋण खातों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि कई ऐसे लोगों और संस्थाओं के नाम पर ऋण स्वीकृत किए गए जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था या जिनकी इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी थीं। स्वयं सहायता समूहों के नियमों का उल्लंघन कर जरूरत से अधिक ऋण वितरित किए गए। कई खातों से ग्राहकों की अनुमति और हस्ताक्षर के बिना रकम स्थानांतरित करने और नकद निकासी के भी प्रमाण मिले।
इसके अलावा कृषि यंत्र, मत्स्य पालन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजनाओं के तहत पात्रता की जांच किए बिना ऋण स्वीकृत करने, फर्जी जीएसटी नंबर वाले सप्लायरों के जरिए भुगतान करने, बिना वैध मूल्यांकन और कानूनी राय के ऋण मंजूर करने तथा सरकारी भूमि पर भी ऋण सीमा स्वीकृत करने जैसी गंभीर अनियमितताएं जांच में उजागर हुई हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने बैंकिंग प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया। फिलहाल विनीत दास से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां अब पूरे फर्जी ऋण नेटवर्क, अन्य संभावित आरोपियों और घोटाले की राशि के उपयोग की भी विस्तृत जांच कर रही हैं।