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Bijapur News: सर्व आदिवासी समाज ने सीईओ के नियंत्रण में बदलाव का किया विरोध, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: बीजापुर ब्यूरो Updated Fri, 06 Mar 2026 07:41 PM IST
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सार

बीजापुर में सर्व आदिवासी समाज ने आदिवासी विकासखंडों के सीईओ का प्रशासनिक नियंत्रण बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया है। समाज ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इसे आदिवासी हितों के खिलाफ बताते हुए प्रस्ताव वापस लेने की मांग की है।

All tribal communities protested against change in CEO control in Bijapur
ज्ञापन सौंपते हुए। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बीजापुर में सर्व आदिवासी समाज ने आदिवासी विकासखंडों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) के प्रशासनिक नियंत्रण को बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया है। समाज ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह प्रस्ताव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग से नियंत्रण हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को हस्तांतरित करने से संबंधित है। समाज ने इसे आदिवासी हितों के विपरीत बताया है।

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पदाधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग नवा रायपुर के पत्र क्रमांक F-No ESTB-102(2)/206/2026-GAD-4, दिनांक 27 फरवरी 2026 के संदर्भ में आया है। समाज का कहना है कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान हैं। आदिम जाति विकास विभाग विशेष रूप से आदिवासी समाज के संरक्षण और विकास के लिए गठित है। प्रशासनिक नियंत्रण बदलने से विभाग की भूमिका और प्रभाव कमजोर हो जाएगा। आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून लागू है। इन क्षेत्रों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का आदिम जाति विकास विभाग के अधीन होना ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है। नियंत्रण बदलने से योजनाओं के क्रियान्वयन में जटिलताएं बढ़ेंगी। इससे आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
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विरोध के प्रमुख कारण
ज्ञापन में कहा गया कि आदिवासी विकासखंडों की भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां सामान्य क्षेत्रों से भिन्न हैं। आदिम जाति विकास विभाग इन परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझता है। यदि इसे पंचायत विभाग में विलय किया जाता है, तो आदिवासी उप योजना की योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर भी असर पड़ने की आशंका है। उनकी वरिष्ठता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

समाज की मांग
सर्व आदिवासी समाज बीजापुर ने शासन से स्पष्ट मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के प्रशासनिक नियंत्रण को किसी भी स्थिति में अन्य विभाग को हस्तांतरित न किया जाए। इसे पूर्व की तरह आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अधीन ही रखा जाए। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। तो पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान कई सामाजिक पदाधिकारी मौजूद थे। इनमें जिला सचिव कमलेश्वर सिंह पैंकरा और गोंड समाज के जिला अध्यक्ष कामेश्वर दुब्बा शामिल थे। इससे पहले गोंडवाना भवन में एक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दोपहर एक बजे गोंडवाना भवन प्रांगण में मनाने का निर्णय लिया गया। होली की शाम आदिवासी युवक सतीश मांडवी के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट की घटना की निंदा की गई। समाज ने शासन-प्रशासन से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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