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CG: मॉर्फ्ड सीडी मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, सीबीआई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक

Thu, 30 Jul 2026 03:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 30 Jul 2026 03:25 PM IST
सार

राजेश मूणत के कथित मॉर्फ्ड सीडी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

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High Court grants interim relief to former CM Bhupesh Baghel in morphed CD case, stays CBI court proceedings
मॉर्फ्ड सीडी मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीडी कांड मामले में हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। भाजपा विधायक राजेश मूणत के कथित मॉर्फ्ड सीडी मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
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हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सीबीआई विशेष न्यायाधीश, रायपुर की ओर से 24 जनवरी 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें मिली दोषमुक्ति को निरस्त कर उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान बघेल की ओर से बताया गया कि पुनरीक्षण न्यायालय के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा चुका है। यदि इस बीच मुकदमे की कार्यवाही जारी रहती है तो हाईकोर्ट में दायर याचिका निष्प्रभावी हो जाएगी। इस आधार पर ट्रायल कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया।
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बता दें कि मामला वर्ष 2017 में तत्कालीन मंत्री और भाजपा विधायक राजेश मूणत की कथित रूप से मॉर्फ्ड अश्लील सीडी तैयार कर उसे प्रसारित कर उनकी छवि धूमिल करने के आरोपों से जुड़ा है। जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने भूपेश बघेल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का उपयोग और अश्लील सामग्री के प्रकाशन एवं प्रसारण जैसी धाराओं में आरोपपत्र प्रस्तुत किया था। 
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मामले में मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए भूपेश बघेल को डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि जनवरी 2026 में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने उस आदेश को पलटते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया, जिसके खिलाफ बघेल ने हाईकोर्ट का रुख किया।


हाईकोर्ट में लगी याचिका की सुनवाई के दौरान बघेल ने तर्क दिया कि पुनरीक्षण अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर न केवल डिस्चार्ज आदेश को पलटा बल्कि आरोपों की प्रकृति भी बदल दी, जबकि ऐसा अधिकार केवल ट्रायल कोर्ट को उचित चरण पर ही प्राप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य आरोप तय करने के लिए आवश्यक “गंभीर संदेह” का आधार भी नहीं बनाते।
कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद सीबीआई की विशेष अदालत में मामले की आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।
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