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CG: कुनकुरी ट्रस्ट के पंजीकरण का लाभ नहीं मिलेगा, हाईकोर्ट ने खारिज की लोयला स्कूल की याचिका
Mon, 27 Jul 2026 08:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
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Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 08:02 PM IST
सार
बिलासपुर हाईकोर्ट ने लोयला स्कूल की याचिका खारिज करते हुए 19.75 लाख रुपये के संपत्तिकर मांग नोटिस को वैध माना। कोर्ट ने कहा कि स्कूल अपने नाम से धारा 12A का पंजीकरण प्रमाणपत्र पेश नहीं कर सका, इसलिए पूर्ण कर छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : highcourt.cg.gov.in
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विस्तार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के लोयला हायर सेकेंडरी स्कूल को बड़ा झटका देते हुए नगर निगम की ओर से जारी 19,75,742 रुपये के संपत्तिकर मांग नोटिस को वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल यह साबित नहीं कर सका कि वह स्वयं आयकर अधिनियम की धारा 12A के तहत पंजीकृत धर्मार्थ (चैरिटेबल) ट्रस्ट है। साथ ही स्पष्ट किया कि बिलासपुर स्थित संस्था, कुनकुरी के नाम जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र का लाभ नहीं ले सकती।
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मामले के अनुसार, बहतराई क्षेत्र के नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद वहां स्थित लोयला स्कूल भी संपत्तिकर के दायरे में आ गया। नगर निगम ने स्कूल प्रबंधन से संपत्तिकर जमा करने को कहा। स्कूल ने स्वनिर्धारण (सेल्फ असेसमेंट) तो दाखिल किया, लेकिन कर जमा नहीं किया। इसके बाद निगम ने 6 अगस्त और 2 सितंबर 2021 को नोटिस जारी कर वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 19,75,742 रुपये का संपत्तिकर जमा करने को कहा।
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स्कूल प्रबंधन ने दावा किया कि वह मध्य प्रदेश जेसुइट्स नामक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट से संबद्ध है, जिसे कर में छूट प्राप्त है। इसके आधार पर संपत्तिकर से भी छूट मिलने की बात कही गई। निगम ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया और कर जमा करने के निर्देश बरकरार रखे।
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इसके खिलाफ स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2005 में राजीव विहार, सीपत रोड, बिलासपुर में लोयला हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट के तहत की गई थी। छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1961 की धारा 136(सी) और 136(ई) के तहत संस्था को संपत्तिकर से छूट मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि संस्था आयकर अधिनियम की धारा 12A के तहत पंजीकृत है और इस संबंध में 10 जुलाई 1974 को तत्कालीन आयकर आयुक्त, मध्य प्रदेश, भोपाल द्वारा प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इसलिए नगर निगम का मांग नोटिस निरस्त किया जाए।
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नगर निगम ने अपने जवाब में कहा कि धारा 12A का प्रमाणपत्र द प्रेसिडेंट, मध्य प्रदेश जेसुइट्स, कुनकुरी (तत्कालीन रायगढ़ जिला) के नाम जारी हुआ था, न कि बिलासपुर स्थित लोयला स्कूल के नाम। इसलिए स्कूल धारा 12A के तहत पंजीकृत संस्था नहीं माना जा सकता। निगम ने यह भी बताया कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद स्कूल अपने नाम का धारा 12A का पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका।
निगम ने यह भी दलील दी कि स्कूल को पहले ही 50 प्रतिशत संपत्तिकर की छूट दी गई है। यदि यह छूट नहीं दी जाती तो कर की राशि करीब 40 लाख रुपये होती। निगम के अनुसार, पूर्ण कर छूट केवल उन्हीं शिक्षण संस्थाओं को मिल सकती है जो धारा 12A के तहत पंजीकृत हों, जबकि अन्य संस्थाएं केवल नियमानुसार अधिकतम 50 प्रतिशत तक की छूट पाने की पात्र होती हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 136 के तहत भारत सरकार, राज्य सरकार, नगर निगम, पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट तथा आयकर अधिनियम की धारा 12A के अंतर्गत पंजीकृत शिक्षण संस्थाओं को संपत्तिकर से पूर्ण छूट मिलती है। अन्य शिक्षण संस्थाओं को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकती है।
कोर्ट ने पाया कि स्कूल द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्र द प्रेसिडेंट, मध्य प्रदेश जेसुइट्स, कुनकुरी के नाम जारी हुआ था, न कि बिलासपुर स्थित संस्था के नाम। ऐसे में बिलासपुर का लोयला स्कूल उस पंजीकरण का लाभ लेने का अधिकारी नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने नगर निगम का संपत्तिकर मांग नोटिस वैध ठहराते हुए लोयला स्कूल की याचिका खारिज कर दी।