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धमतरी कस्टोडियल डेथ: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश, मृतक परिवार को दें मुआवजा
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 09 Oct 2025 02:32 PM IST
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सार
पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत के मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में हुई मौत के कारण स्पष्ट करना राज्य की जिम्मेदारी है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र में हुई पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत के मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में हुई मौत के कारण स्पष्ट करना राज्य की जिम्मेदारी है। ऐसा न करना जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता दुर्गा देवी कैठोलिया ने बताया कि उनके पति दुर्गेंद्र कैठोलिया को 29 मार्च 2025 को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 31 मार्च को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ वे पूरी तरह स्वस्थ थे। शाम 5 बजे उन्हें फिर से थाने में रखा गया, जहाँ कुछ घंटों बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया, जिससे उनकी मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 24 पूर्व-मृत्यु चोटों का उल्लेख है और मौत का कारण दम घुटने से सांस न ले पाने को बताया गया है।
परिवार को मिली झूठी जानकारी
परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अगले दिन बताया कि दुर्गेंद्र बीमार पड़ गए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। बाद में पता चला कि उनकी पहले ही मौत हो चुकी थी। शव मिलने पर परिवार ने शरीर पर चोट के निशान देख विरोध प्रदर्शन किया और उच्च अधिकारियों से शिकायत की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सभी साक्ष्य स्पष्ट बताते हैं कि यह मौत पुलिस यातना से हुई है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सम्मान के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने इसे कस्टोडियल बर्बरता का उदाहरण बताते हुए कहा कि हिरासत में हुई मौत का पूरा दायित्व राज्य पर है।
मुआवजा देने का आदेश
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मृतक की पत्नी दुर्गा देवी को 3 लाख रुपये दिए जाएं, ताकि वह और उनके दो नाबालिग बच्चों की देखभाल कर सकें। मृतक के माता-पिता को 1-1 लाख रुपये प्रदान किए जाएं। यह भुगतान 8 हफ्तों के भीतर किया जाए, अन्यथा राशि पर 9% वार्षिक ब्याज लगेगा।
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याचिकाकर्ता दुर्गा देवी कैठोलिया ने बताया कि उनके पति दुर्गेंद्र कैठोलिया को 29 मार्च 2025 को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 31 मार्च को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ वे पूरी तरह स्वस्थ थे। शाम 5 बजे उन्हें फिर से थाने में रखा गया, जहाँ कुछ घंटों बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया, जिससे उनकी मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 24 पूर्व-मृत्यु चोटों का उल्लेख है और मौत का कारण दम घुटने से सांस न ले पाने को बताया गया है।
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परिवार को मिली झूठी जानकारी
परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अगले दिन बताया कि दुर्गेंद्र बीमार पड़ गए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। बाद में पता चला कि उनकी पहले ही मौत हो चुकी थी। शव मिलने पर परिवार ने शरीर पर चोट के निशान देख विरोध प्रदर्शन किया और उच्च अधिकारियों से शिकायत की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सभी साक्ष्य स्पष्ट बताते हैं कि यह मौत पुलिस यातना से हुई है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सम्मान के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने इसे कस्टोडियल बर्बरता का उदाहरण बताते हुए कहा कि हिरासत में हुई मौत का पूरा दायित्व राज्य पर है।
मुआवजा देने का आदेश
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मृतक की पत्नी दुर्गा देवी को 3 लाख रुपये दिए जाएं, ताकि वह और उनके दो नाबालिग बच्चों की देखभाल कर सकें। मृतक के माता-पिता को 1-1 लाख रुपये प्रदान किए जाएं। यह भुगतान 8 हफ्तों के भीतर किया जाए, अन्यथा राशि पर 9% वार्षिक ब्याज लगेगा।