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Bilaspur : सम्मान निधि मामले में हाईकोर्ट सख्त, आपराधिक संलिप्त को नहीं मिलेगी मीसाबंदी सम्मान निधि
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:03 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी है।
बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आपातकाल के दौरान मीसा (MISA) के तहत जेल जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह साबित करना जरूरी है कि हिरासत केवल राजनीतिक या सामाजिक कारणों से ही हुई हो।
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मामले में रायपुर निवासी 74 वर्षीय रामगुलाम सिंह ठाकुर ने दावा किया था कि वे 1975 के आपातकाल के दौरान छात्र नेता के रूप में आंदोलन में शामिल थे और उन्हें जेल में रखा गया था। इसी आधार पर उन्होंने वर्ष 2008 के नियमों के तहत सम्मान निधि की मांग की थी, लेकिन राज्य सरकार ने उनका आवेदन पहले ही निरस्त कर दिया था।
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सुनवाई के दौरान सामने आया कि उनके खिलाफ 1974 से 1986 के बीच कई आपराधिक मामले दर्ज थे। इसी आधार पर उन्हें योजना के लिए अयोग्य माना गया। हाईकोर्ट ने भी इस तथ्य को सही ठहराते हुए कहा कि नियमों के अनुसार वही व्यक्ति पात्र होगा, जिसकी हिरासत केवल राजनीतिक या सामाजिक कारणों से हुई हो और जिसके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने संबंधित समिति के मूल फैसले को चुनौती नहीं दी, जिससे उनका पक्ष कमजोर हो गया। अंत में अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में किसी तरह की कानूनी गलती या पक्षपात साबित नहीं हुआ है, इसलिए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज की जाती है।