फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bilaspur-Chhattisgarh News ›   Major action in Rs 17.24 crore snakebite compensation scam, three clerks from SDM office and tehsil arrested

CG: 17.24 करोड़ के सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ा एक्शन, एसडीएम कार्यालय और तहसील के तीन बाबू गिरफ्तार

Tue, 21 Jul 2026 11:42 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Vijay Singh Pundir Updated Tue, 21 Jul 2026 11:42 AM IST
विज्ञापन
Major action in Rs 17.24 crore snakebite compensation scam, three clerks from SDM office and tehsil arrested
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : arrest

बिलासपुर जिले में सामने आए 17.24 करोड़ रुपये के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच लगातार नई परतें खोल रही है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में सिम्स की तत्कालीन महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने राजस्व विभाग में कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय के दो बाबुओं और तहसील कार्यालय के एक बाबू को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि इन कर्मचारियों ने फर्जी सर्पदंश प्रकरण तैयार कर शासन से मुआवजा राशि स्वीकृत कराने में अहम भूमिका निभाई।

विज्ञापन


यह मामला विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा उठाए जाने के बाद सुर्खियों में आया था। आरोप है कि सर्पदंश से मौत के फर्जी मामलों के आधार पर करोड़ों रुपये का मुआवजा निकाला गया। पूरे मामले में अब तक 14 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। एसएसपी रजनेश सिंह खुद जांच की निगरानी कर रहे हैं और आरोपियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
विज्ञापन


सरकंडा पुलिस ने रविवार को एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार तथा तहसील कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि इन पर फर्जी प्रकरण दर्ज कर अपनी लॉगिन आईडी से दस्तावेज तैयार करने और मुआवजा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आरोप है। वहीं, इससे पहले तोरवा पुलिस ने सिम्स की तत्कालीन डॉक्टर प्रियंका सोनी को फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पूरे घोटाले के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था। अब तक तहसील कार्यालय से संबद्ध ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा, अधिवक्ता रंजीत चतुर्वेदी समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों के अनुसार गोविंद विश्वकर्मा इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जा रहा है, जबकि मुख्य आरोपी अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अभी फरार है।


पुलिस के अनुसार पिछले पांच वर्षों में सर्पदंश से मौत के संदिग्ध मामलों में रिपोर्ट देने वाले कई डॉक्टरों से भी पूछताछ की जा रही है। जिले में ऐसे करीब 15 संदिग्ध प्रकरण चिन्हित किए गए हैं और जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed