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Bilaspur: हाईकोर्ट में री-एजेंट घोटले में संलिप्त अधिकारियों की नियमित जमानत याचिका खारिज, पढ़ें मामला

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 15 Sep 2025 10:12 PM IST
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सार

री-एजेंट घोटाले में संचालक शशांक चोपड़ा सहित छह आरोपी जेल में है। री-एजेंट घोटाले की ईडी के अलावा एसीबी और ईओडब्ल्यू भी जांच कर रही है। यह पूरा घोटाला करीब 400 करोड़ रुपये का है।

Regular bail petition of officers involved in re-agent scam rejected in High Court
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हाईकोर्ट में सोमवार को री-एजेंट घोटाले में संलिप्त अधिकारियों की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई। वहीं इस मामले में मुख्य सूत्रधार और मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से आठ सितंबर को खारिज हो चुकी है। आज हुई सुनवाई में सीजी एमएससी के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर बसंत कौशिक की जमानत याचिका खारिज की गई। 

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री-एजेंट घोटाले में संचालक शशांक चोपड़ा सहित छह आरोपी जेल में है। री-एजेंट घोटाले की ईडी के अलावा एसीबी और ईओडब्ल्यू भी जांच कर रही है। यह पूरा घोटाला 400 करोड़ रुपये का माना गया है। इसमें गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विवेचना पूरी कर चालान पेश हो चुका है। जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ विवेचना जारी है। गिरफ्तारी के बाद नियमित जमानत के लिए मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा सहित सीजीएमएससी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने याचिका लगाई थी। मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका लगाई थी। 
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वहीं सीजीएमएसी के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर बसंत कौशिक ने हाईकोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल की थी। जमानत याचिका पर हुई पिछली सुनवाई में उनके अधिवक्ताओं ने अदालत से निवेदन किया था कि मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा की जमानत की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उसकी जमानत याचिका की सुनवाई आठ सितंबर को होगी। आठ सितंबर को जमानत याचिका की सुनवाई के बाद यहां सुनवाई की जाए। आठ सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज हो गई।

आज हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर वसंत कौशिक की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने बताया कि ईओडब्लू की जांच में और सत्यापन में पाया गया कि मार्केट में डेढ़ रुपये से लेकर साढ़े आठ रुपये तक मिलने वाला ईडीटीए ट्यूब 352 रुपये प्रति ट्यूब के हिसाब से खरीदा गया है। एफआईआर में इसका जिक्र है। जबकि एफआईआर के बाद हुई विवेचना में 2352 रुपये में ट्यूब खरीदने की बात कही गई है। दोनों बातों में परस्पर विरोधाभास है और इस हिसाब से चार सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का यह घोटाला है। 

इसके अलावा डॉक्टर अनिल परसाई को विभाग द्वारा जारी वर्किंग डिस्ट्रीब्यूशन के अनुसार उन्हें केवल आहरण एवं संवितरण का अधिकार दिया गया था ना कि खरीद का। यह काम सीजीएमएमएसी के संचालक के पद पर बैठे अधिकारी करते थे उन्हें कुछ नहीं किया। जबकि उनके द्वारा बिना बजट की व्यवस्था और अनुमान के इस तरह का कार्य किया गया। डॉ अनिल परसाई के क्षेत्राधिकार में ना तो खरीद का अधिकार था ना खरीद की स्वीकृति देने का और ना ही भुगतान का।

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