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CG: बिलासपुर हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी की सजा बरकरार रखी, पॉक्सो एक्ट के तहत अपील खारिज

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: श्याम जी. Updated Fri, 27 Jun 2025 10:06 PM IST
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सार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंबिकापुर में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में आरोपी की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि पीड़िता की विश्वसनीय गवाही ही दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। मेडिकल और दस्तावेजी साक्ष्यों ने भी दुष्कर्म की पुष्टि की, जिसके आधार पर अपील खारिज कर आरोपी को जेल में रहने का आदेश दिया गया।

Bilaspur High Court upheld sentence of the accused in the rape case of a minor
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म मामले में पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत आरोपी की सजा बरकरार रखी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने कहा कि अत्यंत निष्कलंक और विश्वसनीय गवाह की गवाही के आधार पर भी अभियुक्त को दोषी ठहराया जा सकता है।

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राजू यादव उसे बहला-फुसलाकर ले गया है। बाद में पीड़िता मिली और उसने बयान दिया कि आरोपी उसे कछार के जंगल में ले गया। रात भर वहीं रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया।

पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई, जांच के बाद आईपीसी की धारा 376(3), 376(2)(जी) और पॉक्सो अधिनियम की के तहत आरोप तय किए गए। लड़की की मेडिकल जांच में हालांकि शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले, लेकिन रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। स्कूली और अन्य दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि पीड़िता घटना के समय 16 वर्ष से कम आयु की थी। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) अंबिकापुर ने उसको विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई।

दोषी युवक ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पीड़िता के बयान और आठ गवाहों के साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और सुसंगत हो तो केवल उसी के आधार पर दोष सिद्ध की जा सकती है। छोटी-मोटी विसंगतियां गवाही की विश्वसनीयता को कम नहीं करतीं। मेडिकल और मौखिक गवाहियों को संयुक्त रूप से देखा जाना चाहिए। 

पॉक्सो मामलों में किसी प्रकार की नरमी उचित नहीं है। चिकित्सकीय और दस्तावेजी साक्ष्यों से भी यौन हमला पूरी तरह पुष्ट है। इसमें किसी संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है। अपील खारिज कर आरोपी को सजा पूरी करने के लिए जेल में ही रहने का निर्देश दिया गया और उसे सुप्रीम कोर्ट में अपील की अनुमति दी गई है।

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मामला अंबिकापुर का है, जहां थाने में 30 जून 2020 को दर्ज की गई एक शिकायत में पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी 14 वर्षीय बेटी 29 जून की शाम को अपनी सहेलियों के साथ टहलने निकली थी और वापस नहीं लौटी। उन्हें संदेह था कि गांव में अक्सर आने-जाने वाला युवक
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