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4 करोड़ से अधिक की आर्थिक गड़बड़ी का मामला:पूर्व सहकारी निरीक्षक के खिलाफ ACB ने पेश किया 3500 पन्नों का चालान

अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 24 Jun 2026 05:11 PM IST
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सार

सहकारी गृह निर्माण समितियों को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने और 20 लाख रुपये से अधिक के गबन के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है।

Case of financial irregularities worth more than Rs 4 crore: ACB presented a 3500-page challan against the for
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सहकारी गृह निर्माण समितियों को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने और 20 लाख रुपये से अधिक के गबन के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं परिसमापक राजकुमार नायडू के खिलाफ विशेष न्यायालय में करीब 3500 पन्नों का चालान प्रस्तुत किया है। एसीबी की जांच में आरोपी पर पद का दुरुपयोग कर नियमों की अनदेखी करते हुए सहकारी समितियों की संपत्तियों में अनियमितता बरतने और सरकारी विश्वास को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।


जांच एजेंसी ने राजकुमार नायडू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(सी) और 13(1)(डी) के तहत मामला दर्ज किया था। विस्तृत विवेचना के बाद अब विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र दाखिल किया गया है।
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एसीबी के अनुसार, राजकुमार नायडू ने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति और भैरव गृह निर्माण समिति, रायपुर में परिसमापक के रूप में कार्य करते हुए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कई निर्णय लिए। आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति के सदस्यों को पहले से आवंटित और पंजीकृत 13 भूखंडों का पंजीयन छलपूर्वक निरस्त करा दिया। इसके बाद नए सदस्य बनाकर उन्हीं भूखंडों को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत कलेक्टर गाइडलाइन दर से कम कीमत पर बेच दिया।
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जांच में यह भी सामने आया कि समिति में सड़क और रास्तों के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि का भी नियमों को ताक पर रखकर विक्रय कर दिया गया, जिससे समितियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। भैरव गृह निर्माण समिति में आरोपी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए एक ही परिवार के तीन सदस्यों को भूखंड आवंटित कर उनका पंजीयन करा दिया। इसके अलावा, एक सदस्य से भूखंड की पूरी राशि प्राप्त करने के बावजूद बिना सूचना दिए उसी भूखंड का पंजीयन दूसरे सदस्य के नाम कर दिया गया।

20 लाख रुपये से अधिक के गबन का आरोप
एसीबी की विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी ने भूखंड बिक्री से प्राप्त राशि और निलंबन अवधि के बाद भी समिति के बैंक खातों से निकाली गई रकम का निजी उपयोग किया। जांच में पाया गया कि राजकुमार नायडू ने दोनों समितियों को करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाई, जबकि 20 लाख रुपये से ज्यादा की राशि का गबन कर उसका व्यक्तिगत इस्तेमाल किया। 3500 पन्नों के चालान के साथ एसीबी ने मामले से जुड़े दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्य भी विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। अब प्रकरण की सुनवाई एसीबी विशेष न्यायालय में होगी, जहां आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।
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