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शिक्षा संवाद छत्तीसगढ़ विवाद: सरकारी पत्र का दुरुपयोग कर निजी यूनिवर्सिटीज से वसूली, इवेंट कंपनी पर गंभीर आरोप
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Mon, 16 Feb 2026 03:32 PM IST
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सार
CG News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 17 फरवरी को होने वाले ‘शिक्षा संवाद छत्तीसगढ़ 2026’ कार्यक्रम को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है।
कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
CG News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 17 फरवरी को होने वाले ‘शिक्षा संवाद छत्तीसगढ़ 2026’ कार्यक्रम को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। मामले में नोएडा स्थित इवेंट कंपनी इलेट्स टेक्नोमीडिया पर गंभीर आरोप लगे हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के एक आधिकारिक पत्र का उपयोग कर इस कार्यक्रम को सरकारी आयोजन के रूप में पेश किया। इतना ही नहीं प्राइवेट विश्वविद्यालयों से स्पॉन्सरशिप के नाम पर फंडिंग करने का भी आरोप लगा है।
आरोप है कि इस इवेंट कंपनी ने छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारती दासन के नाम से जारी एक पत्र का इस्तेमाल किया है, जिसमें कार्यक्रम को नि:शुल्क बताकर सरकारी लोगो और लेटर हेड के उपयोग की अनुमति ली गई थी। इसी पत्र के आधार पर प्रदेश की कई निजी विश्वविद्यालयों से स्पॉन्सरशिप के नाम पर जमकर वसूली किया गया। जबकि कार्यक्रम पूरी तरह प्राइवेट कंपनी का था पर इसे सरकारी कार्यक्रम की तरह पेश किया जा रहा था।
सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात ये है कि इस आयोजन का प्रचार-प्रसार छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी किया जा रहा था। इससे यह सरकारी आयोजन माने जाने लगा। वहीं इलेट्स टेक्नोमिडिया की वेबसाइट पर भी इसे विभाग के साथ सहयोग से आयोजित किया जाना बताया गया। वहीं उच्च शिक्षा विभाग को सह-आयोजक के रूप पेश किया गया।
सरकारी कार्यक्रम बताकर किया प्रमोशन
इस मामले में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति महादेव कावरे ने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजक उनके पास पहुंचे थे। उच्च शिक्षा सचिव का पत्र दिखाकर इसे सरकारी कार्यक्रम बताया गया था। इस वजह से इस कार्यक्रम पर संदेह नहीं हुआ ।
'इवेंट कंपनी के खिलाफ हो कानूनी कार्रवाई'
इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने सवाल उठाते हुए मंत्री टंकराम वर्मा से पूछा है कि जिस इलेट्स टेक्नो मिडिया के इवेंट को एमपी सरकार ने वसूली की शिकायत के बाद कार्यक्रम को रद्द कर दिया। उसी इवेंट कंपनी को छतीसगढ़ में कार्यक्रम की अनुमति कैसे दे दी गईं? सरकारी वेबसाइट में मंत्री की फोटो लगाकर छत्तीसगढ़ शासन के लोगो के साथ प्रचार क्यों किया जा रहा हैं? प्रदेश में भी इवेंट के नाम से कम्पनी की तरफ से निजी विश्वविद्यालयों से मोटी रकम लेने की शिकायत मिल रही हैं, वसूली के लिये सचिव के पत्र को आधार बनाया जा रहा है। ये कैसा शिक्षा संवाद हैं? जो वसूली का जरिया बना गया हैं। जिन विश्वविद्यालयों से इवेंट कंपनी कार्यक्रम के नाम से राशि ली है उसे लोटाई जाये। कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
किसने दी लोगो लगाने की अनुमति?
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इलेट्स ने निःशुल्क इवेंट कराने उच्च शिक्षा विभाग को प्रस्ताव दिया था। प्रायवेट इवेंट कंपनी को आखिर छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक लोगो का इस्तेमाल की अनुमति कैसे दी गईं? इवेंट कंपनी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में सेकेट्री के लेटर के आधार पर इवेंट में स्पाँन्सर के लिए फंड कलेक्शन कर रहा हैं इसकी जवाबदारी किसकी हैं, क्या उच्च शिक्षा विभाग ने इवेंट की राशि लेने की अनुमति दी हैं? ये तो सीधा-सीधा सरकारी संरक्षण में लूट हैं।
जांच कराई जायेगी
दूसरी ओर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले में कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मामले में जांच कराई जायेगी।
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आरोप है कि इस इवेंट कंपनी ने छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारती दासन के नाम से जारी एक पत्र का इस्तेमाल किया है, जिसमें कार्यक्रम को नि:शुल्क बताकर सरकारी लोगो और लेटर हेड के उपयोग की अनुमति ली गई थी। इसी पत्र के आधार पर प्रदेश की कई निजी विश्वविद्यालयों से स्पॉन्सरशिप के नाम पर जमकर वसूली किया गया। जबकि कार्यक्रम पूरी तरह प्राइवेट कंपनी का था पर इसे सरकारी कार्यक्रम की तरह पेश किया जा रहा था।
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सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात ये है कि इस आयोजन का प्रचार-प्रसार छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी किया जा रहा था। इससे यह सरकारी आयोजन माने जाने लगा। वहीं इलेट्स टेक्नोमिडिया की वेबसाइट पर भी इसे विभाग के साथ सहयोग से आयोजित किया जाना बताया गया। वहीं उच्च शिक्षा विभाग को सह-आयोजक के रूप पेश किया गया।
सरकारी कार्यक्रम बताकर किया प्रमोशन
इस मामले में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति महादेव कावरे ने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजक उनके पास पहुंचे थे। उच्च शिक्षा सचिव का पत्र दिखाकर इसे सरकारी कार्यक्रम बताया गया था। इस वजह से इस कार्यक्रम पर संदेह नहीं हुआ ।
'इवेंट कंपनी के खिलाफ हो कानूनी कार्रवाई'
इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने सवाल उठाते हुए मंत्री टंकराम वर्मा से पूछा है कि जिस इलेट्स टेक्नो मिडिया के इवेंट को एमपी सरकार ने वसूली की शिकायत के बाद कार्यक्रम को रद्द कर दिया। उसी इवेंट कंपनी को छतीसगढ़ में कार्यक्रम की अनुमति कैसे दे दी गईं? सरकारी वेबसाइट में मंत्री की फोटो लगाकर छत्तीसगढ़ शासन के लोगो के साथ प्रचार क्यों किया जा रहा हैं? प्रदेश में भी इवेंट के नाम से कम्पनी की तरफ से निजी विश्वविद्यालयों से मोटी रकम लेने की शिकायत मिल रही हैं, वसूली के लिये सचिव के पत्र को आधार बनाया जा रहा है। ये कैसा शिक्षा संवाद हैं? जो वसूली का जरिया बना गया हैं। जिन विश्वविद्यालयों से इवेंट कंपनी कार्यक्रम के नाम से राशि ली है उसे लोटाई जाये। कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
किसने दी लोगो लगाने की अनुमति?
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इलेट्स ने निःशुल्क इवेंट कराने उच्च शिक्षा विभाग को प्रस्ताव दिया था। प्रायवेट इवेंट कंपनी को आखिर छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक लोगो का इस्तेमाल की अनुमति कैसे दी गईं? इवेंट कंपनी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में सेकेट्री के लेटर के आधार पर इवेंट में स्पाँन्सर के लिए फंड कलेक्शन कर रहा हैं इसकी जवाबदारी किसकी हैं, क्या उच्च शिक्षा विभाग ने इवेंट की राशि लेने की अनुमति दी हैं? ये तो सीधा-सीधा सरकारी संरक्षण में लूट हैं।
जांच कराई जायेगी
दूसरी ओर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले में कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मामले में जांच कराई जायेगी।