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CG News: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा फैसला, राइस मिलर्स को एक साल तक टैक्स फ्री राहत
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 10 Jan 2026 02:56 PM IST
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सार
इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसानों और राइस मिलर्स को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने मंडियों में लगने वाले शुल्क को आगामी एक वर्ष के लिए शून्य करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी रायपुर में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में चावल निर्यातकों और किसानों के लिए बड़ी घोषणा की गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंडी शुल्क में दी जा रही छूट की अवधि को एक साल और बढ़ाने का ऐलान किया। इस फैसले से चावल उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा और निर्यात को और गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने समिट को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। दंतेवाड़ा सहित प्रदेश के कई इलाकों में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे आगे और प्रोत्साहित किया जाएगा। इस दौरान कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण छत्तीसगढ़ के लिए खास है। इस आयोजन में 12 देशों के खरीदारों और 6 देशों के दूतावास प्रतिनिधियों की मौजूदगी से प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को यूं ही “धान का कटोरा” नहीं कहा जाता, यहां हजारों किस्म की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के जीराफूल और दुबराज जैसे सुगंधित चावल देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल दी गई छूट की अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो रही थी, जिसे अब एक साल और बढ़ा दिया गया है। इससे छत्तीसगढ़ से चावल के निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ से करीब 90 देशों को लगभग एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। राज्य की नई औद्योगिक नीति के तहत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। साथ ही किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है।
समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने चावल पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, उत्पादन में हो रहे नवाचारों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयासों से किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, राइस मिलर्स, चावल निर्यातक और देशभर से आए उद्योग जगत के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री ने समिट को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। दंतेवाड़ा सहित प्रदेश के कई इलाकों में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे आगे और प्रोत्साहित किया जाएगा। इस दौरान कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया गया।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण छत्तीसगढ़ के लिए खास है। इस आयोजन में 12 देशों के खरीदारों और 6 देशों के दूतावास प्रतिनिधियों की मौजूदगी से प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को यूं ही “धान का कटोरा” नहीं कहा जाता, यहां हजारों किस्म की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के जीराफूल और दुबराज जैसे सुगंधित चावल देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल दी गई छूट की अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो रही थी, जिसे अब एक साल और बढ़ा दिया गया है। इससे छत्तीसगढ़ से चावल के निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ से करीब 90 देशों को लगभग एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। राज्य की नई औद्योगिक नीति के तहत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। साथ ही किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है।
समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने चावल पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, उत्पादन में हो रहे नवाचारों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयासों से किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, राइस मिलर्स, चावल निर्यातक और देशभर से आए उद्योग जगत के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।