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CG: सीएम साय बोले- सड़क निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, खराब काम करने वाले ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 06 Mar 2026 08:02 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या घटिया काम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
टेंडर से अवॉर्ड तक पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा तय करने के निर्देश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या घटिया काम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां भी निर्माण कार्य में कमी पाई जाएगी, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी करें। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि आम लोगों की सुविधा से जुड़ा महत्वपूर्ण अधोसंरचना कार्य हैं और इससे सरकार की छवि भी बनती है।
बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले बनी सड़क का जल्दी खराब हो जाना गंभीर लापरवाही का संकेत है। उन्होंने इस मामले की जांच कराने और भविष्य में निर्माण के दौरान ही सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में कई बड़ी सड़क परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन आम लोगों तक इनकी जानकारी नहीं पहुंच पाती। इसलिए प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराए जाएं और उन्हें व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाए।
बैठक में सड़क निर्माण की टेंडर प्रक्रिया को भी तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन तक पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर पर टेंडर लेकर बाद में काम में लापरवाही करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी प्रभावी नियम लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए अलग इकाई बनाने पर भी विचार करने को कहा।
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में करीब 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बारिश के समय संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मुख्यमंत्री ने इन गांवों को सड़क और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने के कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके अलावा लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है, इसलिए सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाए। बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा तक राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की समीक्षा भी की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबी इस परियोजना सहित अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग और चिल्फी क्षेत्र की सड़कों की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने शासकीय भवनों के निर्माण को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब सरकारी भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के साथ किया जाना चाहिए। भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप हो और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए वर्टिकल संरचनाओं को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आम जनता के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को सबसे पहले देखते हैं। इसलिए लोक निर्माण विभाग के कार्यों को समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करना जरूरी है। उन्होंने सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिलने और उन्हें तत्काल ठीक करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने के निर्देश भी दिए।
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बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले बनी सड़क का जल्दी खराब हो जाना गंभीर लापरवाही का संकेत है। उन्होंने इस मामले की जांच कराने और भविष्य में निर्माण के दौरान ही सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में कई बड़ी सड़क परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन आम लोगों तक इनकी जानकारी नहीं पहुंच पाती। इसलिए प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराए जाएं और उन्हें व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाए।
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बैठक में सड़क निर्माण की टेंडर प्रक्रिया को भी तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन तक पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर पर टेंडर लेकर बाद में काम में लापरवाही करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी प्रभावी नियम लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए अलग इकाई बनाने पर भी विचार करने को कहा।
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में करीब 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बारिश के समय संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मुख्यमंत्री ने इन गांवों को सड़क और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने के कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके अलावा लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है, इसलिए सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाए। बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा तक राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की समीक्षा भी की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबी इस परियोजना सहित अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग और चिल्फी क्षेत्र की सड़कों की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने शासकीय भवनों के निर्माण को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब सरकारी भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के साथ किया जाना चाहिए। भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप हो और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए वर्टिकल संरचनाओं को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आम जनता के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को सबसे पहले देखते हैं। इसलिए लोक निर्माण विभाग के कार्यों को समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करना जरूरी है। उन्होंने सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिलने और उन्हें तत्काल ठीक करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने के निर्देश भी दिए।