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'स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और साजिश का खेल, सेवा समाप्ति में बैकडेट की बू': हाईकोर्ट जाएंगी पीड़िता मधु
Thu, 17 Jul 2025 06:41 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Thu, 17 Jul 2025 06:41 PM IST
सार
CG Health News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें विभाग की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगा है।
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जिला अस्पताल धमतरी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
CG Health News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें विभाग की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगा है। पूरे केस में एक महिला कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया गया है, जबकि पूरी चयन समिति और शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर किसी ने भी सवाल नहीं उठाया।
यहां के सीएमएचओ कार्यालय में डीटीसी पद से बर्खास्त महिला कर्मचारी मधु तिवारी का आरोप है कि पहले एक अपराधिक मामले में जेल जा चुके टोमन कौशिक ने रिहाई के बाद उनके खिलाफ आरटीआई डालनी शुरू की और झूठे आरोप लगाकर उनका करियर खराब करने की कोशिश की है। इस साज़िश में धमतरी के सीएमएचओ डॉ. यूएल कौशिक और डीपीएम डॉ. प्रिया कँवर की भूमिका भी संदिग्ध है। कौशिक को विभाग से निकाले जाने के बावजूद दोबारा नौकरी पर रखा गया और उसकी नियुक्ति में प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया।
चयन समिति ही बनी जांचकर्ता
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतकर्ता टोमन ने जिस भर्ती में कथित अनियमितता का आरोप लगाया है, उसके चयन समिति ने भर्ती प्रक्रिया को अंजाम दिया था, उसी से जांच भी करवाई गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यही नहीं, जांच रिपोर्ट राज्य कार्यालय भेजते समय तत्कालीन सीएमएचओ डॉ.डीके तुर्रे का बयान तक नहीं लिया गया और अधूरी जानकारी भेजी गई। यह मामला न सिर्फ विभागीय भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह से व्यक्तिगत दुश्मनी और पद के दुरुपयोग के ज़रिए मानसिक और पेशेवर रूप से निशाना बनाया गया।
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बर्खास्त टोमन कौशिक की वापसी और झूठे आरोपों की शुरुआत
सूत्रों के मुताबिक, विभाग से निकाले गए कर्मचारी टोमन कौशिक, जो एक आपराधिक मामले में जेल जा चुका है। उसने रिहाई के बाद मधु तिवारी के खिलाफ आरटीआई डालना और झूठे आरोप लगाना शुरू किया। तत्कालीन कलेक्टर नम्रता गांधी तक को गुमराह किया गया। नम्रता गांधी से टोमन कौशिक को मिले कार्य सुधार नोटिस को छिपाया गया और उसका काम अच्छा है यह झूठी जानकारी दी गई।
कार्रवाई पर संदेह क्यों?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का राज्य कार्यालय सामान्यत: अवकाश के दिन बंद रहता है, लेकिन मधु तिवारी की सेवा समाप्ति का आदेश रविवार को जारी किया गया। इससे मालूम चलता है कि आदेश बैकडेट में तैयार किया गया।
विधानसभा प्रश्न से ठीक पहले कार्रवाई:
धमतरी के विधायक ओमकार साहू ने विधानसभा में भर्ती घोटाला और 15वें वित्त आयोग की खरीदी में भ्रष्टाचार को लेकर तारांकित प्रश्न लगाया था। इससे एक दिन पहले ही मधु तिवारी पर कार्रवाई कर दी गई। क्या यह राजनीतिक जवाबदेही से बचाव की कोशिश थी? उनका कहना है कि कार्रवाई बिना किसी स्वतंत्र जांच या सुनवाई प्रक्रिया के की गई, जबकि वही चयन समिति जांच कर रही थी जिसने भर्ती की थी।
अब हाईकोर्ट जाएंगी मधु तिवारी
अपने सम्मान, नौकरी और सच्चाई के लिए लड़ रही मधु तिवारी ने अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि ”अगर मुझे ही दोषी ठहराया जा रहा है, तो क्या चयन समिति, सीएमएचओ और डीपीएम जैसे उच्च पदों पर बैठे लोग इस पूरी प्रक्रिया से अछूते हैं?”। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत प्रताड़ना का है, बल्कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ और न्याय व्यवस्था की अनदेखी का बड़ा उदाहरण है। अब देखने वाली बात यह होगी कि हाईकोर्ट में सच कितना उजागर होता है और क्या इस मामले में वास्तविक दोषियों को सजा मिलेगी।
लगा है ये आरोप
स्वास्थ्य विभाग के इस भर्ती मामले में सीएमएचओ कार्यालय की संविदा महिला कर्मचारी मधु तिवारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगा है।
'उनका कृत्य मानव संसाधन नीति 2018 का उल्लंघन'
मामले में धमतरी के सीएमएचओ डॉक्टर डॉ यूएल कौशिक ने उमर उजाला से बातचीत में कहा कि आरोपी मधु तिवारी का जवाब संतोषप्रद और समाधानकारक नहीं है। उनका कृत्य मानव संसाधन नीति 2018 का उल्लंघन है और सदाचार की श्रेणी में आता है। उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था।
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यहां के सीएमएचओ कार्यालय में डीटीसी पद से बर्खास्त महिला कर्मचारी मधु तिवारी का आरोप है कि पहले एक अपराधिक मामले में जेल जा चुके टोमन कौशिक ने रिहाई के बाद उनके खिलाफ आरटीआई डालनी शुरू की और झूठे आरोप लगाकर उनका करियर खराब करने की कोशिश की है। इस साज़िश में धमतरी के सीएमएचओ डॉ. यूएल कौशिक और डीपीएम डॉ. प्रिया कँवर की भूमिका भी संदिग्ध है। कौशिक को विभाग से निकाले जाने के बावजूद दोबारा नौकरी पर रखा गया और उसकी नियुक्ति में प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया।
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चयन समिति ही बनी जांचकर्ता
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतकर्ता टोमन ने जिस भर्ती में कथित अनियमितता का आरोप लगाया है, उसके चयन समिति ने भर्ती प्रक्रिया को अंजाम दिया था, उसी से जांच भी करवाई गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यही नहीं, जांच रिपोर्ट राज्य कार्यालय भेजते समय तत्कालीन सीएमएचओ डॉ.डीके तुर्रे का बयान तक नहीं लिया गया और अधूरी जानकारी भेजी गई। यह मामला न सिर्फ विभागीय भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह से व्यक्तिगत दुश्मनी और पद के दुरुपयोग के ज़रिए मानसिक और पेशेवर रूप से निशाना बनाया गया।
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बर्खास्त टोमन कौशिक की वापसी और झूठे आरोपों की शुरुआत
सूत्रों के मुताबिक, विभाग से निकाले गए कर्मचारी टोमन कौशिक, जो एक आपराधिक मामले में जेल जा चुका है। उसने रिहाई के बाद मधु तिवारी के खिलाफ आरटीआई डालना और झूठे आरोप लगाना शुरू किया। तत्कालीन कलेक्टर नम्रता गांधी तक को गुमराह किया गया। नम्रता गांधी से टोमन कौशिक को मिले कार्य सुधार नोटिस को छिपाया गया और उसका काम अच्छा है यह झूठी जानकारी दी गई।
कार्रवाई पर संदेह क्यों?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का राज्य कार्यालय सामान्यत: अवकाश के दिन बंद रहता है, लेकिन मधु तिवारी की सेवा समाप्ति का आदेश रविवार को जारी किया गया। इससे मालूम चलता है कि आदेश बैकडेट में तैयार किया गया।
विधानसभा प्रश्न से ठीक पहले कार्रवाई:
धमतरी के विधायक ओमकार साहू ने विधानसभा में भर्ती घोटाला और 15वें वित्त आयोग की खरीदी में भ्रष्टाचार को लेकर तारांकित प्रश्न लगाया था। इससे एक दिन पहले ही मधु तिवारी पर कार्रवाई कर दी गई। क्या यह राजनीतिक जवाबदेही से बचाव की कोशिश थी? उनका कहना है कि कार्रवाई बिना किसी स्वतंत्र जांच या सुनवाई प्रक्रिया के की गई, जबकि वही चयन समिति जांच कर रही थी जिसने भर्ती की थी।
अब हाईकोर्ट जाएंगी मधु तिवारी
अपने सम्मान, नौकरी और सच्चाई के लिए लड़ रही मधु तिवारी ने अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि ”अगर मुझे ही दोषी ठहराया जा रहा है, तो क्या चयन समिति, सीएमएचओ और डीपीएम जैसे उच्च पदों पर बैठे लोग इस पूरी प्रक्रिया से अछूते हैं?”। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत प्रताड़ना का है, बल्कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ और न्याय व्यवस्था की अनदेखी का बड़ा उदाहरण है। अब देखने वाली बात यह होगी कि हाईकोर्ट में सच कितना उजागर होता है और क्या इस मामले में वास्तविक दोषियों को सजा मिलेगी।
लगा है ये आरोप
स्वास्थ्य विभाग के इस भर्ती मामले में सीएमएचओ कार्यालय की संविदा महिला कर्मचारी मधु तिवारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगा है।
'उनका कृत्य मानव संसाधन नीति 2018 का उल्लंघन'
मामले में धमतरी के सीएमएचओ डॉक्टर डॉ यूएल कौशिक ने उमर उजाला से बातचीत में कहा कि आरोपी मधु तिवारी का जवाब संतोषप्रद और समाधानकारक नहीं है। उनका कृत्य मानव संसाधन नीति 2018 का उल्लंघन है और सदाचार की श्रेणी में आता है। उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था।