{"_id":"6810c868fb8517d55b014ce6","slug":"deputy-cm-vijay-sharma-followed-folk-tradition-in-son-daughter-marriage-in-kabirdham-2025-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"अक्ती तिहार: कबीरधाम में पुतरा-पुतरी विवाह में डिप्टी सीएम विजय शर्मा की सहभागिता, बच्चों संग निभाई परंपरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अक्ती तिहार: कबीरधाम में पुतरा-पुतरी विवाह में डिप्टी सीएम विजय शर्मा की सहभागिता, बच्चों संग निभाई परंपरा
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: श्याम जी.
Updated Tue, 29 Apr 2025 07:27 PM IST
विज्ञापन
सार
कबीरधाम जिले में अक्षय तृतीया पर पुतरा-पुतरी विवाह का उत्सव मनाया गया, जिसमें डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बच्चों के साथ टीकावन की रस्म निभाई। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का एक अनोखा प्रयास है।
पुतरा-पुतरी विवाह में शामिल हुए डिप्टी सीएम विजय शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में अक्षय तृतीया के अवसर पर पुतरा-पुतरी विवाह की अनोखी परंपरा का आयोजन किया गया। इस मनोरंजक प्रथा में मिट्टी के पुतले-पुतलियों (पुतरा-पुतरी) का विवाह बच्चों द्वारा उत्साहपूर्वक संपन्न किया जाता है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मंगलवार को कवर्धा विधायक व उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्राम खिरसाली और मोतिमपुर में इस आनंदमय आयोजन में शामिल होकर बच्चों के साथ टीकावन की रस्म निभाई और सांस्कृतिक जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
Trending Videos
विजय शर्मा ने कहा, "अक्ती तिहार (अक्षय तृतीया) हमारी लोक परंपरा का एक जीवंत उत्सव है, जिसमें बच्चे खेल-खेल में संस्कृति, रिश्तों और परंपराओं को सीखते हैं। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और भावी पीढ़ी में मूल्यों को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण कदम है। बच्चों का इस परंपरा को अपनाना हमारी सामूहिक चेतना और एकता को दर्शाता है।"
विज्ञापन
विज्ञापन
बरात और मंडप की शानदार झलक
कार्यक्रम में बच्चों ने पूरे उत्साह से गुड्डे-गुड़ियों की बरात निकाली, मंडप सजाया और पारंपरिक विवाह रस्मों का अनुकरण किया। डिप्टी सीएम के आगमन पर बच्चों ने तालियों और लोक गीतों के साथ उनका स्वागत किया। शर्मा ने बच्चों की रचनात्मकता, मंडप सजावट और परंपरागत रीति-रिवाजों की समझ की सराहना की। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और रस्मों ने सभी को छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जोड़ा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।