Dhamtari: तेजी से गिर रहा गंगरेल बांध का जलस्तर, 450 तालाबों की बुझा रहा प्यास, सहायक बांधो पर बढ़ेगी निर्भरता
गर्मी के शुरुवाती दौर में ही बांध का पानी सूखने लगा है और बांध का जल स्तर गिरने लगा है। वहीं किसान सिंचाई के लिए गर्मी के समय भी बांध के पानी पर निर्भर रहते हैं।
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धमतरी में स्थित प्रदेश का सबसे बड़ा बांध गंगरेल है, जहां से भिलाई स्टील प्लांट समेत धमतरी, भिलाई शहर और प्रदेश की राजधानी सहित अन्य जिलो में पेयजल के लिए पानी सप्लाई किया जाता है। इस बांध की क्षमता लगभग 32 टीएमसी है, जिसमे वर्तमान में सिर्फ 7 टीएमसी ही पानी शेष रह गया है। गर्मी के शुरुवाती दौर में ही बांध का पानी सूखने लगा है और बांध का जल स्तर गिरने लगा है। वहीं किसान सिंचाई के लिए गर्मी के समय भी बांध के पानी पर निर्भर रहते हैं।
रबी में मांग के बावजूद गंगरेल से पानी नहीं छोड़ा गया है लेकिन धमतरी जिले के 450 तालाबों को भरने के लिए गंगरेल से पानी दिया जा रहा क्योंकि तेजी के साथ यहां भूमि का जलस्तर नीचे गिर रहा था, जल स्तर बनाए रखने के लिए पानी छोड़ना जरूरी हो गया था। घटते हुए जल स्तर को देखते हुए कलेक्टर नम्रता गांधी ने धमतरी को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर बोर खनन पर रोक लगा दिया है, साथ ही नल से पानी सप्लाई के दौरान टुल्लू पंप का इस्तेमाल भी नहीं करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इधर बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ दशक यानि 16 साल पहले इसी तरह की समस्या सामने आई थी जब गंगरेल बांध में डेड स्टोरेज का पानी पेन स्टॉक के जरिए निस्तारी और पीने के लिए निकाला गया था। हालांकि इस साल गंभीर संकट नहीं होने का दावा जल संसाधन विभाग के अफसरों ने किया है।
इसकी वजह सहयोगी बांध मुरूमसिल्ली, सोंढुर व दुधावा बांध मिलाकर 13.858 टीएमसी उपयोगी पानी है, जबकि कुल जलभराव वर्तमान में 19.863 टीएमसी है। इनमें से केवल 5.65 टीएमसी पानी निस्तारी के लिए दिया जा सकता है। गंगरेल बांध के सहयोगी रुद्री बांध से मुख्य नहर से पानी छोडा गया है। जिसके माध्यम से धमतरी जिले के तालाबों को भरा जा रहा है। इस भीषण गर्मी के पड़ने से लोगों को निस्तारी की समस्या हो रही थी। ऐसे में रुद्री बांध से पानी छोडने की मांग लगातार लोगों के व्दारा की जा रही थी। जिसको देखते हुए प्रशासन ने बांध से पानी छोडने का फैसला लिया था।
जिला कलेक्टर का कहना है कि अभी 20 दिनों तक लगातार नहर के माध्यम से निस्तारी के लिए पानी चालू रहेगा। वहीं आगे मांग के अनुसार दोबारा पानी छोडा जायेगा। बता दें कि बीते 5 साल में पहली बार अभी तक लगभग 505 हैंडपंप अप्रैल माह की शुरुआत में ही बंद हो चुके हैं जो इस बार पेयजल की गम्भीर समस्या उत्पन्न होने का खतरा माना जा रहा है।