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छत्तीसगढ़ में देश का सबसे बड़ा नक्सली डंप बरामद: गृहमंत्री शर्मा बोले- 31 मार्च 2026 तक खत्म होगा नक्सलवाद

अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर/जगदलपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Wed, 11 Mar 2026 04:29 PM IST
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India biggest Naxalite dump recovered in Chhattisgarh, vijay sharma on naxalite
मीडिया से चर्चा करते छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा - फोटो : Amar ujala digital
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छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में देश का अब तक का सबसे बड़ा नक्सली डंप बरामद किया गया है। इसके साथ ही कुल 108 नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने आज बुधवार को राजधानी रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत आज जगदलपुर में कुल 108 नक्सली मुख्यधारा में शामिल हुए है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों मे 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इनमें DVCM 6, CYPCM 3, PPCM 18, ACM 23 और 56 मेंबर शामिल हैं।
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108 माओवादियों पर 3 करोड़ 95 लाख का इनाम

सरकार ने सरेंडर करने वाले इन माओवादियों पर कुल 3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।इसके अनुसार बीजापुर से 37, नारायणपुर से 4, बस्तर से 16, कांकेर से 3, सुकमा से 18 और दंतेवाड़ा से 30 माओवादी सरेंडर किए हैं। इनके पास से सुरक्षा बलों ने कुल 101 हथियार बरामद किए हैं, जिनमें AK-47 राइफल 6, इंसास राइफल 11, कार्बाइन 5, 303 LMG 20,303 राइफल 25, 12 बोर राइफल 11, 315 बोर राइफल 13 सहित अन्य हथियार बरामद किए गए हैं।

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देश में पहली बार नक्सल डंप से तीन करोड़ से ज्यादा रुपए बरामद

देश के नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद बरामद किया गया है। वहीं 1.64 करोड़ मूल्य के 1 किलो सोना भी बरामद किया गया है। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे डंप माना जा रहा है।

 

 

गृहमंत्री विजय शर्मा बोले- 31 मार्च 2026 तक टारगेट

गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक राज्य में नक्सलवाद समाप्त करने का हमारा लक्ष्य पूरा होगा। सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों के निरंतर अभियान के कारण माओवादी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। सरकार उन्हें पुनर्वास की सभी सुविधाएं प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे नक्सल प्रभावित जिलों में शांति और विकास की दिशा में ऐतिहासिक सफलता बताया है।

 

 

शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के चलते बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

ये रहे मौजूद

आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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