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बस्तर ओलंपिक: दो दिन तक दिखेगा खेल का उत्साह, समापन में आएंगे बाईचुंग भूटिया
संवाद न्यूज एजेंसी, जगदलपुर
Published by: राहुल तिवारी
Updated Thu, 11 Dec 2025 02:20 PM IST
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सार
बस्तर में गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री ने बस्तर ओलंपिक की शुरुआत की। दो दिन चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से खिलाड़ी पहुंचे हैं। समापन समारोह में फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया के आने की खबर पर खिलाड़ियों में उत्साह है।
जिला प्रशासन ने जारी किया बाईचुंग भूटिया का वीडियो
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बस्तर जिले में गुरुवार की सुबह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा बस्तर ओलंपिक की शुरुआत की गई। यह ओलंपिक दो दिनों तक चलेगा। इसके समापन पर सिक्किम के महान फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया आएंगे। इसे लेकर फुटबॉल खिलाड़ियों में काफी खुशी देखी जा रही है।
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गुरुवार की सुबह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बस्तर ओलंपिक की शुरुआत की गई। इस ओलंपिक में पूरे छत्तीसगढ़ के अलग अलग जिलों से खिलाड़ियों को बुलाया गया है। यहां दो दिनों तक खेल का उत्साह देखा जाएगा।
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जिला प्रशासन ने एक वीडियो जारी करते हुए बताया कि सिक्किम के महान फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे। बताया गया कि बाईचुंग भूटिया सिक्किम के एक सेवानिवृत्त भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी हैं और स्ट्राइकर के रूप में खेलते थे। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फुटबॉल का मिसाल माना जाता है। अपने शानदार शूटिंग कौशल के कारण उन्हें सिक्किमी स्नाइपर कहा जाता है। उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए उन्हें 2008 में पद्मश्री और 2014 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
बाईचुंग भूटिया का जन्म 15 दिसंबर 1976 को सिक्किम के तिनकिताम में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे फुटबॉल, बैडमिंटन और बास्केटबॉल में निपुण थे। 1992 के सुब्रोतो कप में वे बेस्ट प्लेयर बनकर उभरे। वे कोलकाता डर्बी में हैट्रिक बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने और एक मैच में पांच गोल करने वाले एकमात्र भारतीय फुटबॉलर बने।
उन्होंने यूरोप की बरी एफसी के लिए भी खेला। घुटने की चोटों से जूझते हुए भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन जारी रखा। वे भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान बने और टीम को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने शूटिंग कौशल के कारण वे सिक्किमी स्नाइपर के नाम से प्रसिद्ध हुए। सिक्किम के नामची में उनके नाम पर एक स्टेडियम भी बनाया गया है।