{"_id":"6855028951b4d03c4e0e3809","slug":"comprehensive-water-conservation-mega-campaign-start-today-campaign-mor-gaon-mor-pani-in-kabirdham-2025-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"कबीरधाम में अनूठी पहल: आज से घर-घर बनेगा सोख पिट, नागरिक करेंगे श्रमदान; नाम है 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कबीरधाम में अनूठी पहल: आज से घर-घर बनेगा सोख पिट, नागरिक करेंगे श्रमदान; नाम है 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 20 Jun 2025 12:11 PM IST
विज्ञापन
सार
कबीरधाम जिले में 'मोर गांव - मोर पानी' अभियान आज से शुरू हो रहा है। ये एक व्यापक जल संरक्षण महा अभियान है। गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए इस अभियान को शुरु किया गया है।
जल संरक्षण की अनूठी पहल
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
जिले में वर्षा जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने की दिशा में “मोर गांव - मोर पानी“ अभियान के तहत आज 20 जून शुक्रवार को एक व्यापक जल संरक्षण महाअभियान शुरू हो गया है। इस विशेष दिन पर जिले के सभी नागरिक सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक श्रमदान कर अपने-अपने घरों में सोख पिट (सोखता गड्ढा) का निर्माण कर रहे है।
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि जिले में गिरते भूजल स्तर को संजीवनी देने व वर्षा जल के संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के लिए जिले में “मोर गांव - मोर पानी” अभियान के अंतर्गत आज जल संरक्षण महाअभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में लोगों से संपर्क कर इसके लिए जागरूक किया गया है। यह अभियान “घर का पानी घर में, गांव का पानी गांव में“ की सोच को साकार करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
यह सभी के जन सहयोग से ही संभव हो सकता है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है। हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। बरसात का पानी यदि घर के भीतर सोख पिट (सोखता गड्ढा) के माध्यम से जमीन में समा जाए, तो भूजल स्तर में सुधार संभव है। यह महाअभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा, जिससे न केवल जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित जल स्रोत भी उपलब्ध हो सकेगा।
जिले के चारों ब्लॉक कवर्धा, पंडरिया, बोड़ला और सहसपुर लोहारा को ग्राउंड वॉटर बोर्ड द्वारा दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें कवर्धा व पंडरिया को क्रिटिकल जोन तथा बोड़ला व सहसपुर लोहारा को सेमी-क्रिटिकल जोन में रखा गया है।
इसी कारण जिले में जल संरक्षण को लेकर व्यापक और सामूहिक प्रयास से अभियान को पूरा किया जाएगा। सोख पिट को लेकर बताया गया कि एक सोख पिट वर्षाकाल में दो हजार से साढ़े तीन हजार लीटर तक वर्षा जल को अवशोषित करने में सक्षम होता है। इस प्रकार जिलेभर में सोख पिट निर्माण से 20 हजार लाख लीटर से लेकर 30 हजार 500 लाख लीटर तक पानी को जमीन में रिसाया जा सकता है, जो जिले के भूजल स्तर को सुधारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।
Trending Videos
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि जिले में गिरते भूजल स्तर को संजीवनी देने व वर्षा जल के संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के लिए जिले में “मोर गांव - मोर पानी” अभियान के अंतर्गत आज जल संरक्षण महाअभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में लोगों से संपर्क कर इसके लिए जागरूक किया गया है। यह अभियान “घर का पानी घर में, गांव का पानी गांव में“ की सोच को साकार करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह सभी के जन सहयोग से ही संभव हो सकता है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है। हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। बरसात का पानी यदि घर के भीतर सोख पिट (सोखता गड्ढा) के माध्यम से जमीन में समा जाए, तो भूजल स्तर में सुधार संभव है। यह महाअभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा, जिससे न केवल जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित जल स्रोत भी उपलब्ध हो सकेगा।
जिले के चारों ब्लॉक कवर्धा, पंडरिया, बोड़ला और सहसपुर लोहारा को ग्राउंड वॉटर बोर्ड द्वारा दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें कवर्धा व पंडरिया को क्रिटिकल जोन तथा बोड़ला व सहसपुर लोहारा को सेमी-क्रिटिकल जोन में रखा गया है।
इसी कारण जिले में जल संरक्षण को लेकर व्यापक और सामूहिक प्रयास से अभियान को पूरा किया जाएगा। सोख पिट को लेकर बताया गया कि एक सोख पिट वर्षाकाल में दो हजार से साढ़े तीन हजार लीटर तक वर्षा जल को अवशोषित करने में सक्षम होता है। इस प्रकार जिलेभर में सोख पिट निर्माण से 20 हजार लाख लीटर से लेकर 30 हजार 500 लाख लीटर तक पानी को जमीन में रिसाया जा सकता है, जो जिले के भूजल स्तर को सुधारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।