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कबीरधाम: परीक्षा बनी मजाक, पांच जिलों में छह-छह प्रश्नपत्र निकले हुबहू, सिस्टम पर उठे सवाल

अमर उजाला नेटवर्क,कबीरधाम Published by: कबीरधाम ब्यूरो Updated Fri, 10 Apr 2026 08:22 PM IST
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सार

कबीरधाम जिले सहित प्रदेश के पांच जिलों में मिडिल स्कूल की वार्षिक परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह कटघरे में खड़ी हो गई है। आज शुक्रवार को आयोजित आखिरी पेपर में छठवीं अंग्रेजी और सातवीं सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र जब विभिन्न जिलों से मिलाए गए, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

Exams Turn into a Farce Six Question Papers Across Five Districts Found Identical Questions Raised Over System
डीईओ कार्यालय कबीरधाम
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विस्तार

कबीरधाम जिले सहित प्रदेश के पांच जिलों में मिडिल स्कूल की वार्षिक परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह कटघरे में खड़ी हो गई है। आज शुक्रवार को आयोजित आखिरी पेपर में छठवीं अंग्रेजी और सातवीं सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र जब विभिन्न जिलों से मिलाए गए, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। सभी प्रश्नपत्र हुबहू एक जैसे निकले। इससे परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला केवल एक-दो विषयों तक सीमित नहीं है। जानकारी अनुसार कबीरधाम, दुर्ग, धमतरी, बालोद और बलरामपुर जिलों में कक्षा 6वीं और 7वीं के सभी विषयों के प्रश्नपत्र एक जैसे छपवाकर परीक्षा ले ली गई। जबकि लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने 4 फरवरी को स्पष्ट निर्देश जारी कर प्रत्येक जिले को अपने स्तर पर प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन और मुद्रण की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके लिए जिला स्तरीय समितियां गठित करने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी की गई।

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पहले से आउट पेपर से भी परीक्षा
मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। 30 मार्च को कबीरधाम, दुर्ग, धमतरी और बलरामपुर में छठवीं गणित और सातवीं हिंदी का पेपर आयोजित हुआ था। वहीं बालोद जिले में ठीक उसी प्रश्नपत्र से 1 अप्रैल को परीक्षा ले ली गई। यानी जिन जिलों में 30 मार्च को परीक्षा हो चुकी थी, वहां के छात्रों के पास पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध था, जिससे बालोद में परीक्षा कराई गई। इसे लेकर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
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शिक्षकों में आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने नाराजगी जताई है। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि यह शिक्षा व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है। एक ओर सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अभियान चला रही है, वहीं जिम्मेदार अधिकारी ही उसकी साख पर बट्टा लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई जांच समिति गठित नहीं की गई। अब एसोसिएशन जल्द ही मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग करेगा।

सिस्टम की लापरवाही या संगठित गड़बड़ी?
लगातार पांच जिलों में एक जैसे प्रश्नपत्र सामने आना महज संयोग नहीं माना जा रहा। सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर सुनियोजित गड़बड़ी? यदि समय रहते इसकी जांच नहीं हुई, तो शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ सकता है।

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