कबीरधाम: बिजली कंपनी की लापरवाही से 8 साल के मासूम का हाथ कटा, 11 केवी तार से लगा था करंट, एफआईआर दर्ज
कबीरधाम जिले के बोड़ला नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 10 में बिजली कंपनी की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। 11 केवी के लटकते विद्युत तार की चपेट में आने से 8 वर्षीय बालक बुरी तरह झुलस गया।
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कबीरधाम जिले के बोड़ला नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 10 में बिजली कंपनी की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। 11 केवी के लटकते विद्युत तार की चपेट में आने से 8 वर्षीय बालक बुरी तरह झुलस गया, जिसके बाद इलाज के दौरान उसका दाहिना हाथ काटना पड़ा। घटना के बाद परिजनों ने विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ थाना बोड़ला में लिखित शिकायत देकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने कल 14 मार्च को बिजली कंपनी बोड़ला के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ बीएनएस की धारा 125(b), 287 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
थाना से मिली जानकारी अनुसार वार्ड क्रमांक 10 निवासी सुरूज बाई (32) ने पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उसने अपने आवेदन में बताया कि वह मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं। 23 फरवरी 2026 को उनका 8 वर्षीय पुत्र अर्जुन पटेल खेलते-खेलते घर के पास बने टीन शेड में गेंद लेने गया। उसी शेड के ऊपर से 11 केवी का विद्युत तार ढीला होकर लटक रहा था और टीन सेड से सटा हुआ था। जैसे ही बच्चा वहां पहुंचा, वह बिजली के करंट की चपेट में आ गया। करंट लगने से उसका दाहिना हाथ और दोनों पैर बुरी तरह झुलस गए। घटना के बाद बच्चे को पहले बोड़ला सरकारी अस्पताल, फिर कवर्धा जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे रायपुर मेकाहारा रेफर किया गया। बाद में उसे कवर्धा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने गंभीर संक्रमण के कारण 2 मार्च 2026 को कुहनी के ऊपर से दाहिना हाथ काटना पड़ा। फिलहाल बच्चे का इलाज जारी है।
पहले भी की गई थी लिखित शिकायत
परिजनों का आरोप है कि जिस स्थान से तार गुजर रहा था, वह पहले से ही ढीला और टीन शेड से सटा हुआ था। बच्चे के नाना बिसेलाल पटेल ने इस खतरे को देखते हुए 16 सितंबर 2025 को बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता कार्यालय बोड़ला में लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद भी कई बार कार्यालय जाकर मौखिक रूप से जानकारी दी गई, लेकिन तार को ठीक नहीं किया गया। मां सुरूज बाई ने थाना बोड़ला में शिकायत देकर कहा है कि बिजली कंपनी की लापरवाही के कारण उनके बेटे का जीवन प्रभावित हो गया है और इलाज में अब तक एक लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुका है।