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कबीरधाम: एक लाख शिक्षकों की पेंशन पर संकट, शासन के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे शिक्षक
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: कबीरधाम ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 10:48 PM IST
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सार
संविलियन पूर्व सेवा अवधि को पेंशन में शामिल किए जाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों ने एक बार फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
एक लाख शिक्षकों की पेंशन पर संकट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संविलियन पूर्व सेवा अवधि को पेंशन में शामिल किए जाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों ने एक बार फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी आदेश में याचिकाकर्ता शिक्षकों के अभ्यावेदनों को अमान्य किए जाने पर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे उच्च न्यायालय के निर्देशों की मूल भावना के विपरीत बताया है।
एसोसिएशन का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने 9 जून 2026 को जारी आदेश में वर्ष 2021 के डब्ल्यूपीएस क्रमांक 777, 5699 और 2255 (रमेश चंद्रवंशी एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य) मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों की सही व्याख्या किए बिना शिक्षकों के अभ्यावेदन निरस्त कर दिए हैं।
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एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि यदि शासन वास्तव में न्यायालय की भावना के अनुरूप निर्णय लेता, तो संविलियन पूर्व सेवा अवधि को पेंशन योग्य सेवा मानते हुए स्पष्ट आदेश जारी करता। उन्होंने कहा कि वर्तमान आदेश में केवल पहले से लागू संविलियन संबंधी प्रावधानों को दोहराया गया है, जबकि मूल विवाद संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन में शामिल करने का है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 से 2018 के बीच नियुक्त एक लाख से अधिक शिक्षक पूर्व सेवा अवधि के पेंशन लाभ से वंचित हैं। इसके कारण कई शिक्षक बिना पेंशन के सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जबकि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में शिक्षकों को केवल आंशिक पेंशन का लाभ मिलने की आशंका है।
एसोसिएशन के अनुसार, पेंशन की यह लड़ाई लंबे समय से जारी है। आंदोलन, हड़ताल, घेराव, ज्ञापन और न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से लगातार यह मांग उठाई जाती रही है। संगठन का कहना है कि उच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न निर्णयों में संविलियन पूर्व सेवा को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करने, संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के सिद्धांतों का पालन करने तथा पेंशन को कर्मचारियों का अधिकार मानने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर टिप्पणियां की हैं।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि शासन ने क्रमोन्नति संबंधी वर्ष 2026 की रिट अपील क्रमांक 191 और अन्य भिन्न मामलों के निर्णयों का हवाला देकर पेंशन संबंधी अभ्यावेदन खारिज किए हैं, जबकि इन मामलों का पेंशन विवाद से सीधा संबंध नहीं है।
एसोसिएशन की प्रांतीय इकाई ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी परामर्श लेना शुरू कर दिया है और जल्द ही सक्षम न्यायालय में शासन के आदेश को चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। संगठन का कहना है कि यह लड़ाई केवल कुछ याचिकाकर्ताओं की नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के भविष्य और सम्मानजनक सेवानिवृत्ति से जुड़ा मुद्दा है।