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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Kabirdham's Forest Region Hit by Malaria: Three Baiga Tribals Reportedly Die in 15 Days, Over 35 Infected

CG News: कबीरधाम के वनांचल में मलेरिया का प्रकोप, 15 दिन में तीन बैगा आदिवासियों की मौत का दावा

Wed, 29 Jul 2026 09:49 PM IST
कबीरधाम ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम Published by: कबीरधाम ब्यूरो Updated Wed, 29 Jul 2026 09:49 PM IST
सार

कबीरधाम के झलमला वनांचल में मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों ने 15 दिनों में तीन बैगा आदिवासियों की मौत का दावा किया है। स्वास्थ्य विभाग ने विशेष टीमें तैनात कर सर्वे, जांच और उपचार अभियान तेज कर दिया है, जबकि एनसीडीसी की टीम भी जांच में जुटी है।

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Kabirdham's Forest Region Hit by Malaria: Three Baiga Tribals Reportedly Die in 15 Days, Over 35 Infected
गांव में जांच के लिए पहुंची टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीणों का दावा है कि झलमला सेक्टर में पिछले 15 दिनों के भीतर तीन बैगा आदिवासियों की मौत हुई है, जबकि करीब 35 लोग मलेरिया से संक्रमित हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है और कई जगह एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है।

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हालात गंभीर होने के बाद बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य दल तैनात कर दिए हैं। टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं और रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) तथा रक्तपट्टी के माध्यम से मलेरिया की जांच की जा रही है। संक्रमित मरीजों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी जून से मलेरिया सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। अब तक जिले में 40 हजार से अधिक लोगों की घर-घर जांच की जा चुकी है। सर्वे के दौरान बुखार, सर्दी और खांसी से पीड़ित लोगों का उपचार भी किया गया। विभाग का दावा है कि 10 से 12 गांवों में मिले मलेरिया के छिटपुट मामलों का समय रहते उपचार कर संक्रमण को नियंत्रित कर लिया गया।


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पिछले एक सप्ताह में ही झलमला और रेंगाखार सेक्टर में 20 हजार से अधिक लोगों की मलेरिया जांच की गई है। सेक्टर सुपरवाइजर के नेतृत्व में 15 से 20 सर्वे दल लगातार गांवों में सक्रिय हैं। इन दलों में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और मितानिन शामिल हैं। वहीं, सीएचसी झलमला, पीएचसी रेंगाखार और पीएचसी चिल्फी सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) रायपुर की विशेषज्ञ टीम भी झलमला और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में पैरासाइटोलॉजी एवं एंटोमोलॉजी संबंधी अध्ययन कर रही है, ताकि संक्रमण के कारणों का पता लगाकर नियंत्रण उपायों को और प्रभावी बनाया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग प्रभावित गांवों में कीटनाशक का छिड़काव, लार्वा नियंत्रण, कुओं और नलकूपों का क्लोरीनेशन तथा कीटनाशकयुक्त मच्छरदानियों के वितरण की तैयारी कर रहा है। इसके लिए राज्य स्तर पर कार्ययोजना भी भेजी जा चुकी है। ग्रामीणों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, बुखार होने पर तत्काल जांच कराने और चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवा का पूरा कोर्स पूरा करने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. डीके तूरे ने लोगों से अपील की है कि बुखार आने पर बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया की जांच कराएं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और पूरा इलाज ही मलेरिया को गंभीर होने से रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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