{"_id":"6a68921a51e84f9d8d0fd0f8","slug":"cm-vishnu-deo-sai-arrived-at-bhoramdeo-temple-and-participated-in-a-grand-ritual-2026-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"CG News: भोरमदेव मंदिर पहुंचे CM विष्णुदेव साय, महाअनुष्ठान में हुए शामिल, कांवड़ यात्रियों को लिए किया एलान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CG News: भोरमदेव मंदिर पहुंचे CM विष्णुदेव साय, महाअनुष्ठान में हुए शामिल, कांवड़ यात्रियों को लिए किया एलान
Tue, 28 Jul 2026 04:59 PM IST
कबीरधाम ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम
Published by: कबीरधाम ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 04:59 PM IST
सार
Chhattisgarh News: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्नी कौशल्या के साथ भोरमदेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और पंच दिवसीय महा चतुर शुद्धि सहस्र कलशम् महाअनुष्ठान में भाग लिया।
विज्ञापन
पत्नी संग पूजा करते सीएम विष्णुदेव साय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी पत्नी कौशल्या साय के साथ विश्वप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा मंदिर की परिक्रमा कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की मंगलकामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पंच दिवसीय महा चतुर शुद्धि सहस्र कलशम् महाअनुष्ठान में भी सम्मिलित हुए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर प्रदेश की उन्नति, सामाजिक सद्भाव और लोकमंगल की प्रार्थना की।
क्या बोले सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भोरमदेव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का गौरवशाली प्रतीक है। ऐसे महाअनुष्ठान हमारी प्राचीन वैदिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और लोककल्याण की भावना को भी सशक्त बनाते हैं। आगामी 30 जुलाई से भगवान शिव की आराधना का पावन श्रावण मास प्रारंभ होने जा रहा है।
यह भी पढ़ें: कार्बन फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद एक और लापरवाही, बिना सुरक्षा किट मजदूरों से कराया काम, एक की हालत बिगड़ी
विज्ञापन
कांवड़ यात्रा को लेकर क्या बोले सीएम?
पिछले दो वर्षों से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ भोरमदेव धाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक भी है। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के अभिनंदन के लिए वे स्वयं भोरमदेव धाम पहुंचकर पुष्पवर्षा करेंगे।
यह भी पढ़ें: संस्कृत विद्यालय में आधी रात लगी भीषण आग, छात्रावास में रह रहे 50 से अधिक छात्रों को सुरक्षित निकाला
महाअनुष्ठान से प्रदेश के सुख-समृद्धि की कामना
यह पंच दिवसीय महाअनुष्ठान कबीरधाम सहित संपूर्ण छत्तीसगढ़ के सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण की भावना से आयोजित किया जा रहा है। यह अनुष्ठान प्राण-प्रतिष्ठित मंदिरों के शुद्धिकरण एवं दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार की प्राचीन वैदिक परंपरा पर आधारित है, जिसे भगवान परशुराम स्रोतम तथा आगम शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया जा रहा है।
विज्ञापन
क्या बोले सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भोरमदेव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का गौरवशाली प्रतीक है। ऐसे महाअनुष्ठान हमारी प्राचीन वैदिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और लोककल्याण की भावना को भी सशक्त बनाते हैं। आगामी 30 जुलाई से भगवान शिव की आराधना का पावन श्रावण मास प्रारंभ होने जा रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: कार्बन फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद एक और लापरवाही, बिना सुरक्षा किट मजदूरों से कराया काम, एक की हालत बिगड़ी
विज्ञापन
कांवड़ यात्रा को लेकर क्या बोले सीएम?
पिछले दो वर्षों से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ भोरमदेव धाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक भी है। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के अभिनंदन के लिए वे स्वयं भोरमदेव धाम पहुंचकर पुष्पवर्षा करेंगे।
यह भी पढ़ें: संस्कृत विद्यालय में आधी रात लगी भीषण आग, छात्रावास में रह रहे 50 से अधिक छात्रों को सुरक्षित निकाला
महाअनुष्ठान से प्रदेश के सुख-समृद्धि की कामना
यह पंच दिवसीय महाअनुष्ठान कबीरधाम सहित संपूर्ण छत्तीसगढ़ के सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण की भावना से आयोजित किया जा रहा है। यह अनुष्ठान प्राण-प्रतिष्ठित मंदिरों के शुद्धिकरण एवं दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार की प्राचीन वैदिक परंपरा पर आधारित है, जिसे भगवान परशुराम स्रोतम तथा आगम शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया जा रहा है।