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Korba: पिता की हत्या में उम्रकैद, फिर पैरोल पर फरार, 6 साल तक प्लांट में करता रहा नौकरी; मुखबिर ने खोली पोल

Tue, 28 Jul 2026 05:26 PM IST
कोरबा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोरबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Tue, 28 Jul 2026 05:26 PM IST
सार

Chhattisgarh News: कोरबा में पिता की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा एक कैदी पैरोल पर रिहा होने के बाद छह साल तक फरार रहा और इसी दौरान एक औद्योगिक संयंत्र की ठेका कंपनी में नौकरी करता रहा। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

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Fugitive convict arrested after six years on parole. One brother held other still wanted
पुलिस की गिरफ्त में पैरोल पर भागा अपराधी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरबा जिले में औद्योगिक संयंत्रों की भरमार है। यहां ठेका कंपनियों में स्थानीय के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आए मजदूर भी काम करते हैं। नियमानुसार प्रत्येक मजदूर का चरित्र सत्यापन कराना अनिवार्य है, ताकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग संयंत्रों के भीतर प्रवेश न कर सकें। लेकिन इस नियम की खुलेआम अनदेखी हो रही है। इसका ताजा उदाहरण तब सामने आया, जब पुलिस ने पिता की हत्या के मामले में सजायाफ्ता और पैरोल पर रिहा होने के बाद छह साल से फरार चल रहे कैदी को गिरफ्तार किया। वह एक औद्योगिक संयंत्र की ठेका कंपनी में काम कर रहा था।
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पिता की हत्या में मिली थी उम्रकैद की सजा
यह मामला बालको थाना क्षेत्र के परसाभाठा का है। यहां वर्ष 2007 में दरोगा कुर्मे अपने घर में मृत पाए गए थे। जांच में उनके दो बेटों देवानंद कुर्मे और सूरज कुर्मे की भूमिका सामने आई। पुलिस ने IPC की धारा 302, 449 और 34 के तहत दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास तथा 12-12 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके बाद दोनों को बिलासपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
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पैरोल मिली, लेकिन वापस जेल नहीं लौटे
वर्ष 2020 में दोनों ने पैरोल पर रिहाई के लिए आवेदन किया। 7 अप्रैल को उन्हें पैरोल मिली और 1 मई को जेल में उपस्थित होना था, लेकिन पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद दोनों फरार हो गए। करीब पांच साल बाद इस मामले में बालको थाने में शिकायत दर्ज हुई।
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मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबोचा
एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर एएसपी लखन पटले और सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी युवराज तिवारी की टीम फरार कैदियों की तलाश में जुटी थी। मुखबिर से सूचना मिली कि देवानंद अपने घर पर मौजूद है। पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

ठेका कंपनी में करता रहा नौकरी
पूछताछ में पता चला कि पैरोल पर रिहा होने के बाद देवानंद पहले बलीदा क्षेत्र स्थित अपने गांव गया। इसके बाद वह कोरबा लौट आया और एक औद्योगिक संयंत्र के भीतर ठेका कंपनी में नौकरी करने लगा। नौकरी के लिए उसने सभी आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए थे।
देवानंद का इस तरह औद्योगिक संयंत्र के भीतर काम करना मजदूरों के चरित्र सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर दिया है, जबकि दूसरे फरार भाई सूरज की तलाश जारी है।


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'पुलिस वेरिफिकेशन बेहद जरूरी'
विशेषज्ञों का कहना है कि चरित्र सत्यापन सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके लिए पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म भरना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पूरी की जा सकती है। इसी सत्यापन के आधार पर औद्योगिक संयंत्रों में गेट पास जारी किए जाते हैं। यदि इस मामले की गहराई से जांच की जाए तो कई और गंभीर खामियां सामने आ सकती हैं।
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