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कबीरधाम में विकास की नई राह: पहाड़ काटकर बनी सड़क से बदली तस्वीर, अब घर तक पहुंच रहे वाहन; सुविधाएं हुईं आसान
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: कबीरधाम ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 09:42 PM IST
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सार
कबीरधाम के चाऊरडोंगरी गांव में 1.74 करोड़ रुपये की लागत से तीन किलोमीटर सड़क बनने से आवागमन आसान हो गया है। पहले जहां लोग पैदल चलते थे, अब वाहन पहुंच रहे हैं। सड़क से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजमर्रा की सुविधाओं में बड़ा सुधार आया है।
ड्रोन व्यू
- फोटो : credit
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विस्तार
कबीरधाम जिले के सुदूर पहाड़ी गांव चाऊरडोंगरी में अब विकास की गाड़ी पहुंच चुकी है। जिस गांव तक पहुंचने के लिए कभी लोगों को खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर घंटों पैदल चलना पड़ता था, वहां अब पक्की सड़क बन जाने से वाहन सीधे घर तक पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) विभाग ने अमनिया बांगर रोड राहीडांड से चाऊरडोंगरी तक करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण 1.74 करोड़ रुपये की लागत से कराया है।
पहाड़ों को काटकर बनाई गई यह सड़क अब गांव को बारहमासी संपर्क से जोड़ रही है। गांव के लोगों के लिए यह सड़क किसी वरदान से कम नहीं है। पहले बरसात के दिनों में गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। जरूरत का सामान लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना मजबूरी थी। बीमार पड़ने पर मरीजों को खाट या अन्य साधनों से ढोकर ले जाना पड़ता था, जिससे समय पर इलाज मिल पाना मुश्किल होता था।
सड़क बनने के बाद अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। वाहन सीधे गांव तक पहुंच रहे हैं। कुई और पंडरिया जैसे इलाकों तक आना-जाना आसान हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब न सिर्फ आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतें भी आसानी से पूरी हो रही हैं। सड़क बनने का सबसे बड़ा फायदा स्वास्थ्य सुविधाओं में देखने को मिल रहा है।
अब मरीजों को तुरंत वाहन से अस्पताल ले जाया जा सकता है, जिससे समय पर इलाज मिल रहा है और जोखिम कम हुआ है। पीएमजीएसवाई विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के. ठाकुर के अनुसार, योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ना है। चाऊरडोंगरी जैसे पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
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पहाड़ों को काटकर बनाई गई यह सड़क अब गांव को बारहमासी संपर्क से जोड़ रही है। गांव के लोगों के लिए यह सड़क किसी वरदान से कम नहीं है। पहले बरसात के दिनों में गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। जरूरत का सामान लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना मजबूरी थी। बीमार पड़ने पर मरीजों को खाट या अन्य साधनों से ढोकर ले जाना पड़ता था, जिससे समय पर इलाज मिल पाना मुश्किल होता था।
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सड़क बनने के बाद अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। वाहन सीधे गांव तक पहुंच रहे हैं। कुई और पंडरिया जैसे इलाकों तक आना-जाना आसान हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब न सिर्फ आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतें भी आसानी से पूरी हो रही हैं। सड़क बनने का सबसे बड़ा फायदा स्वास्थ्य सुविधाओं में देखने को मिल रहा है।
अब मरीजों को तुरंत वाहन से अस्पताल ले जाया जा सकता है, जिससे समय पर इलाज मिल रहा है और जोखिम कम हुआ है। पीएमजीएसवाई विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के. ठाकुर के अनुसार, योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ना है। चाऊरडोंगरी जैसे पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।


