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28 साल की नौकरी, फिर भी रिकॉर्ड अधूरा: कबीरधाम के सैकड़ों शिक्षकों की सर्विस बुक आज तक ऑडिट नहीं, पढें
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: कबीरधाम ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 07:17 PM IST
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सार
जिले में सैकड़ों शिक्षकों की कई साल की सेवा के बावजूद उनकी सेवापुस्तिका और सीजीपीएफ पासबुक का संपरीक्षण वर्षों से लंबित है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इस गंभीर मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा से मुलाकात कर तत्काल संपरीक्षण पूरा कराने की मांग की है।
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विस्तार
जिले में 20 से 25 साल की सेवा पूरी कर चुके सैकड़ों शिक्षक संवर्ग कर्मचारियों की सेवापुस्तिका का ऑडिट लंबित है। स्थानीय संपरीक्षक और कोष एवं लेखा कार्यालय से यह ऑडिट आज तक नहीं कराया गया है। इस गंभीर मामले को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा से मुलाकात की।
एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी के नेतृत्व में डीईओ से मांग रखी। उन्होंने सेवापुस्तिका और सीजीपीएफ पासबुक का अद्यतन संधारण तथा लंबित ऑडिट तत्काल पूर्ण कराने को कहा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति वर्ष 1998 में पंचायत विभाग के तहत शुरू हुई थी। वर्ष 2018 में उनका स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक एलबी संवर्ग के रूप में संविलियन हुआ।
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नियमानुसार हर वेतन निर्धारण के बाद सेवापुस्तिका का ऑडिट अनिवार्य है लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की सर्विस बुक का सत्यापन नहीं हो पाया है। डीईओ एफआर वर्मा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने जिले के सभी बीईओ और डीडीओ प्राचार्यों को पत्र जारी कर सेवापुस्तिकाओं का सत्यापन और ऑडिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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एसोसिएशन ने बताया कि वर्ष 1998 से 2018 तक पंचायत व नगरीय निकाय के शिक्षकों के रिकॉर्ड का ऑडिट स्थानीय संपरीक्षक कार्यालय राजनांदगांव से होना था। इस दौरान वर्ष 2003, 2007 और 2013 में वेतन निर्धारण हुआ था। वर्ष 2018 में संविलियन के बाद भी नया वेतन निर्धारण किया गया। नियमों के अनुसार, इन सभी अवसरों पर सेवापुस्तिका का सत्यापन अनिवार्य था, पर अधिकांश मामलों में प्रक्रिया अधूरी रही।
शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद निर्धारित वेतनमान का ऑडिट कोष एवं लेखा कार्यालय दुर्ग से कराया जाना था। यह प्रक्रिया भी कई मामलों में लंबित है। टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि वेतन निर्धारण ऑडिट के बाद ही वैध होता है। बिना ऑडिट कई बार अधिक वेतन निर्धारण पर रिकवरी और कम वेतन निर्धारण पर एरियर्स की स्थिति बनती है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।