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कोरबा: एसईसीएल की कोयला धूल से पांच गांव परेशान, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Mon, 15 Jun 2026 11:14 AM IST
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Five villages troubled by SECL's coal dust
एसईसीएल की कोयला धूल से पांच गांव परेशान - फोटो : अमर उजाला
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एसईसीएल सुराकछार की रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली कोयले की काली धूल ने वार्ड 65 प्रेम नगर समेत आसपास के 5 गांवों का जीना मुश्किल कर दिया है। जरा सी हवा चलने पर पंखा दफाई, भेरोताल, सुरा कछार, भक्तु दफाई तक महीन कोल डस्ट का गुबार पहुंच जाता है। इससे दमा, खांसी, सांस और आंखों की बीमारियां बढ़ गई हैं। समस्या से त्रस्त होकर सोमवार 15 जून 2026 को नगर निगम पार्षद प्रेम कुमार साहू के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण पंखा दफाई रेलवे फाटक पर सड़क पर उतर आए और अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू कर दिया।



सुराकछार भूमिगत खदान की रेल साइडिंग पर रोज भारी वाहनों से कोयला गिरता और लोड होता है। आरोप है कि प्रबंधन साइडिंग और रोड पर पानी का छिड़काव नहीं कर रहा, जिससे डस्ट सीधे हवा में मिल रही है। पार्षद प्रेम साहू ने पहले कलेक्टर को पत्र देकर साइडिंग बंद करने की मांग की थी। बार-बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता चुना। सुबह से ही लोग चटाई बिछाकर फाटक पर बैठ गए और नारेबाजी की।
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पार्षद का कहना है कि जब तक साइडिंग पर 24 घंटे वाटर स्प्रिंकलर, मिस्ट गन और फॉग कैनन नहीं लगते, कोयला लोडिंग बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही गांवों में स्वास्थ्य शिविर और मूलभूत सुविधाएं भी मांगी गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि धूल के कारण घर की छत, कपड़े, खाने-पीने की चीजें तक काली हो जाती हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे।
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चक्काजाम की सूचना पर कुसमुंडा थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया और एसईसीएल प्रबंधन से बातचीत का आश्वासन दिया। लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हैं। पार्षद प्रेम साहू ने साफ कहा कि लिखित आश्वासन और ठोस कदम के बिना चक्काजाम नहीं हटेगा।

डॉक्टरों के अनुसार कोल डस्ट में सिलिका और कार्बन कण होते हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक संपर्क से सीओपीडी और फेफड़ों का कैंसर तक हो सकता है। बच्चे-बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे में समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को एसईसीएल गेट तक ले जाया जाएगा।

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