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Korba: रायगढ़ के बाद अब कोरबा में विस्तार के विरोध में उतरे प्रभावित

अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Thu, 12 Feb 2026 04:45 PM IST
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सार

ग्रामीण पूरन सिह कश्यप ने बताया कि इससे ग्राम सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, ढनढनी, संडेल, बरीडीह, खोड्डल, दर्राभाठाएवं पताढ़ी के लगभग 750 मकान तथा लगभग चार हजार की आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होकर विस्थापन की स्थिति में आ जाएगी।

After Raigarh now the affected people have come out in protest against expansion in Korba
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विस्तार

रायगढ़ के बाद अब कोरबा जिले में भी पावर प्लांट की जनसुनवाई का विरोध का स्वर उठने लगा है।लैंको पावर प्लांट (वर्तमान में अडानी कोरबा पावर प्लांट) से प्रभावित ग्रामवासियों को न तो अब तक रोजगार मिला और न ही चिकित्सा, स्वास्थ्य तथा बच्चों के लिए शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। इससे नाराज ग्रामवासियों ने संयंत्र के विस्तार परियोजना का विरोध करने की घोषणा की है। साथ ही पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से ग्रामीणों के हित में संरक्षण देते हुए हस्तक्षेप करने की मांग की है।

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पूर्व मंत्री अग्रवाल को लिखे पत्र में संयंत्र प्रभावित ग्रामीणों ने कहा है कि लैंको संयंत्र की स्थापना वर्ष 2005-06 में की गई थी। उस समय भूमि अधिग्रहण एवं जनसुनवाई के दौरान कंपनी प्रबंधन ने वचन दिया था कि भूमि प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को रोजगार प्रदान किया जाएगा, साथ ही चिकित्सा एवं शिक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद वर्ष 2012-13 में तीसरी एवं चौथी इकाई के विस्तार के समय भी पुनः आश्वासन दिए गए, किंतु उनका भी पालन नहीं किया गया जबकि इन दोनों इकाइयों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।उन्होंने कहा कि वर्तमान में संयंत्र में 1600 मेगावाट क्षमता की पांचवीं एवं छठवीं इकाई के विस्तार की तैयारी की जा रही है।
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ग्रामीण पूरन सिह कश्यप ने बताया कि इससे ग्राम सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, ढनढनी, संडेल, बरीडीह, खोड्डल, दर्राभाठाएवं पताढ़ी के लगभग 750 मकान तथा लगभग चार हजार की आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होकर विस्थापन की स्थिति में आ जाएगी। पूर्व में किए गए वादों की पूर्ति न होने से ग्रामवासियों में गहरी चिंता, असंतोष एवं अविश्वास की भावना व्याप्त है। ग्रामीण अश्वनी कुमार तंवर पुनः भूमि अधिग्रहण किया जाता है और नए वादे किए जाते हैं. तो ग्रामवासियों को पुनः ठगे जाने का भय है। इसलिए सभी प्रभावित ग्रामवासियों ने एकमत होकर निर्णय लिया है कि जब तक पूर्व में किए गए रोजगार एवं पुनर्वास संबंधी सभी वादों की लिखित एवं वास्तविक पूर्ति नहीं की जाती, तब तक किसी भी नई जनसुनवाई या भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए सहमति प्रदान नहीं करेंगे।

सरगबुंदिया जनपद सदस्य रीना सिदार ने बताया कि उन्होंने कहा कि आप क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं पूर्व मंत्री रहे हैं तथा सदैव जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इसलिए निवेदन है कि कंपनी प्रबंधन एवं जिला प्रशासन से इस विषय में चर्चा कर पूर्व वादों की स्थिति स्पष्ट कराया जाए, प्रत्येक प्रभावित परिवार को रोजगार सुनिश्चित करने के लिए ठोस एवं लिखित कार्ययोजना बनाई जाए। पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति को विधिसम्मत एवं पारदर्शी तरीके से लागू कराए तथा जब तक पूर्व दायित्वों का पालन नहीं होता, तब तक प्रस्तावित विस्तार प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप किया जाए। ग्रामवासी अपने पुश्तैनी घर, जमीन व आजीविका की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने के लिए बाध्य हैं। वहीं गुरुवार की सुबह काफी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से इसकी शिकायत की गई।

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