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कोरबा: इंसानियत की मिसाल, दीपका परियोजना के वर्कशॉप परिवार ने अनाथ युवक और जरूरतमंद युवती का कराया विवाह
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 07:01 PM IST
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सार
उड़ीसा के बालासोर निवासी रंजीत राउत बचपन में ही माता-पिता को खो चुके हैं। संघर्ष कर शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें एक निजी कंपनी में नौकरी मिली, लेकिन विवाह को लेकर चिंता बनी हुई थी।
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विस्तार
कोरबा में गेवरा-दीपका कोयलांचल क्षेत्र में मानवता और सामाजिक संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल उस समय देखने को मिली जब दीपका परियोजना के वर्कशॉप परिवार ने मिलकर एक अनाथ युवक और जरूरतमंद युवती का विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया। यहां आर्थिक मदद से बढ़कर लोगों ने बेटी-बेटे के माता-पिता बनकर फर्ज निभाया।
उड़ीसा के बालासोर निवासी रंजीत राउत बचपन में ही माता-पिता को खो चुके हैं। संघर्ष कर शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें एक निजी कंपनी में नौकरी मिली, लेकिन विवाह को लेकर चिंता बनी हुई थी। दीपका वर्कशॉप के इंजीनियर रघुवंश सिंह लंबे समय से रंजीत के भविष्य को लेकर चिंतित थे। इसी दौरान बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक छोटे कस्बे में रहने वाली गरीब युवती के परिवार की जानकारी मिली। वीडियो कॉल से दोनों की सहमति बनी और विवाह तय हुआ।
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विवाह में दीपका वर्कशॉप परिवार ने दोनों पक्षों की जिम्मेदारी संभाली। सरिता रघुवंश सिंह ने कन्यादान और वधु पक्ष की रस्में निभाईं। क्रेन-ग्रेड-पेलोडर-डोजर इंचार्ज नवीन सिंह क्षत्रिय, शिवचरण राठौर और बृजेश कुमार मिश्रा ने वर पक्ष की भूमिका निभाई। प्रगति नगर निवासी ज्योति राजेश जायसवाल दंपती ने स्वेच्छा से कन्यादान कर गृहस्थी का सामान भेंट किया।
इस पुनीत कार्य के लिए दीपका वर्कशॉप के अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगरवासियों ने 2 से 2.5 लाख रुपए जुटाए। दहेज में कूलर, अलमारी, डबल बेड, पंखा, कांसे के बर्तन सहित घरेलू सामान दिया गया। मेहंदी, हल्दी, मंडप, बारात और वैदिक मंत्रों के साथ फेरे हुए। फेरों के समय लोगों ने पुष्पवर्षा कर नवदंपती को आशीर्वाद दिया।
आयोजन में संदीप मानिकपुरी, रमेश गुरुद्वान, बनवारीलाल चंद्रा, गया प्रसाद चंद्रा, जगमोहन कौशिक, शिव शंकर शुक्ला, संजय पांडे, राजेंद्र जायसवाल सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। भावुक माहौल में कई लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा नवीन सिंह क्षत्रिय ने तैयार की और समाज के हर वर्ग को जोड़ा।
नवीन सिंह क्षत्रिय ने कहा कि बेसहारा बेटे और गरीब बेटी का घर बसाना सबसे बड़ा सामाजिक दायित्व है। हमारा उद्देश्य था कि आर्थिक अभाव किसी की खुशियों में बाधा न बने। रघुवंश सिंह ने कहा कि रंजीत को संघर्ष करते देख विवाह की चिंता रहती थी, आज आत्मिक संतोष मिला है। शिवचरण राठौर ने कहा कि समाज एकजुट हो जाए तो कोई नेक कार्य असंभव नहीं। यह विवाह सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति और मानवीय मूल्यों का प्रतीक बन गया।

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