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कोरबा में गौरी-गौरा उत्सव: 45 साल पुरानी परंपरा में डूबा गांव, विधायक पटेल भी हुए शामिल

अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: राहुल तिवारी Updated Fri, 02 Jan 2026 04:26 PM IST
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सार

कोरबा जिले के ग्राम बोईदा में 45 वर्षों से चली आ रही गौरी-गौरा विसर्जन की परंपरा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। भव्य शोभायात्रा, लोकनृत्य और पूजा-अर्चना के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया, जिसमें विधायक प्रेमचंद पटेल भी शामिल हुए।

MLA Premchand Patel participated in Gauri Gaura Utsav in Boida at Korba
कोरबा में गौरी-गौरा उत्सव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरबा जिले के ग्राम बोईदा में आस्था और उल्लास के साथ पांच दिवसीय गौरी-गौरा विसर्जन का पर्व धूमधाम से संपन्न हुआ। यह परंपरा पिछले 45 वर्षों से गांव में निभाई जा रही है, जो स्थानीय संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस वर्ष के आयोजन में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने भी शिरकत की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
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परंपरा का निर्वहन और ग्रामीणों का उत्साह
हरदीबाजार से सटे ग्राम बोईदा आनंद नगर में गौरी-गौरा विसर्जन को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखा गया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे ग्रामीण मांदर और ढोल की थाप पर लोकगीतों के साथ झूमते हुए नजर आए। आनंद नगर से शुरू हुई भव्य शोभायात्रा गुड़ी चौक और गौंटिया पारा होते हुए बड़े तालाब तक पहुंची। यहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद, गौरा-गौरी की प्रतिमाओं को जल में विसर्जित किया गया।
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मान्यता है कि शोभायात्रा के आगे महिलाएं जमीन पर लेटकर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करती हैं। इस परंपरा का निर्वहन करते हुए कई महिलाओं ने अपनी गहरी आस्था व्यक्त की। परंपरा के अनुसार, गौरा की बारात बलदेव जगत के घर से और गौरी की बारात महेंद्र मरावी के घर पहुंची, जहां बैगा पुजारी ने पूरी रात विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया। रात भर भक्तजन जागकर गौरी-गौरा के गीत गाते रहे।

विधायक की रही उपस्थिति
विसर्जन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने गौरी-गौरा की पूजा-अर्चना की और क्षेत्र में सुख-शांति व समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि दुष्यंत शर्मा, जनपद सदस्य अंजनी कौशल श्रीवास, सरपंच संजय राज, भाजपा मंडल अध्यक्ष कृष्णा पटेल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।

सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का संगम
ग्राम बोईदा में गौरी-गौरा का विसर्जन मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का एक जीवंत उदाहरण भी है। पांच दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पूरा गांव एक साथ मिलकर अपनी परंपराओं का निर्वहन करता है, जो आपसी सौहार्द को बढ़ावा देता है।
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