Korba News: राशन वितरण की लापरवाही पर युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, 3 महीने का खाद्यान 10 दिनों में देने की मांग
नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास के नेतृत्व में युवा कांग्रेस ने आज प्रदर्शन किया। खाद्यान वितरण नहीं होने पर खाद्य शाखा के मुख्य अधिकारी को पत्र सौंपा।
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युवा कांग्रेस ने जिले में खाद्यान वितरण की समस्याओं को लेकर खाद्य शाखा के मुख्य अधिकारी को एक पत्र सौंपा है। पत्र में जनवरी, फरवरी और मार्च माह का खाद्यान वितरण 10 दिनों के भीतर करने की मांग की गई है।
नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास के नेतृत्व में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष विकाश सिंह और राकेश पंकज की उपस्थिति में यह पत्र सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि जिले के कई क्षेत्रों में 2-3 महीनों से राशन वितरण में लापरवाही हो रही है, जिससे लगभग 30-40% हितग्राहियों को खाद्यान नहीं मिल पा रहा है।
प्रमुख रूप से पार्षद संदीप डहरिया, हेमंत साहनी, जनपद सदस्य अनिल खूटे, उपसरपंच विनोद उर्रे, जिला सचिव कमल किशोर चन्द्रा, अजीत बर्मन, बबलू मरवा, प्रमोद काकरे, धनंजय राठौड़, लक्की, सूरज, रोहन, आदिल, शुभम, छोटू और अनेक साथी उपस्थित थे।
नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास ने बताया कि बाकी मोंगरा, कटघोरा, पताड़ी, करतला के अलावा ऐसे कई क्षेत्र है जहां जनवरी-फरवरी और मार्च 3 माह के जो राशन वितरण किए गए हैं। उसमें बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिसमें से 40% लोगों को अब तक राशन नहीं मिल पाया है। जहां दुकानदारों के द्वारा कहा जा रहा है कि वितरण बंद कर दिया गया है।

मधुसूदन दास ने बताया कि भाजपा सरकार जिस तरह से 85 करोड लोगों को राशन वितरण करने की बात कह रही है वह धरातल पर किस तरह से है यह सामने उदाहरण है लोग कितने परेशान है, राशन को लेकर इस सब जानते हैं। जिन अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा लापरवाही हुई है उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।

अधिकारियों के द्वारा कहा गया है कि ट्रांसपोर्टिंग और साइड दिक्कत आने के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है। 10 दिवस के भीतर इस समस्या का निराकरण करने के बाद कही गई है। अगर समस्या करनी रखना नहीं होता है तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम कंवर ने बताया कि अप्रैल, मई और जून तीन माह का अभी मिल रहा है। 10 दिन के अंदर उससे पहले वाले महक राशन जिन्हें नहीं मिला है उन्हें बहुत जल्द मिल जाएगा। जहां खाद्य अधिकारी के द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया तब जाकर आंदोलन समाप्त हुआ।