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महासमुंद: 40 लाख कुंतल से अधिक धान 182 केंद्रों में जाम, समय पर नहीं हो रहा उठाव, रूक सकती है खरीदी

अमर उजाला नेटवर्क, महासमुंद Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 09 Jan 2026 03:33 PM IST
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सार

महासमुंद जिले में समर्थन मूल्य में धान खरीदी के बाद उठाव में देरी के कारण धान खरीदी व्यवस्था चरमरा गई है। जिले में 40 लाख क्विंटल से अधिक धान 182 केंद्रों में जाम है। समितियों में जगह खत्म हो रही है।

More than 40 lakh quintals of paddy are piled up at 182 centers in Mahasamund
182 केंद्रों में जाम हुआ धान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महासमुंद जिले में समर्थन मूल्य में धान खरीदी के बाद उठाव में देरी के कारण धान खरीदी व्यवस्था चरमरा गई है। जिले में 40 लाख क्विंटल से अधिक धान 182 केंद्रों में जाम है। समितियों में जगह खत्म हो रही है, कई केंद्रों पर धान खरीदी आने वाले समय में रोकनी पड़ सकती है जिससे किसानों को धान बेचने में भारी दिक्कत हो सकता है। मिलर भी समय पर धान नहीं उठा पा रहे हैं। 

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प्रदेश सहित महासमुंद जिले में भी 15 नवंबर से सरकार के द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य में धान की खरीदी की जा रही है। लेकिन सही समय पर धान का उठाव नहीं हो पा रहा है। खरीदी के बाद धान का उठाव का जिम्मा मार्कफेड का होता है, लेकिन विपणन विभाग के द्वारा इस बार ट्रांसपोर्टरों के द्वारा उठाव नहीं करने और जिले में केवल राइस मिलरों के द्वारा धान का उठाव करवाने की परिस्थितियां निर्मित होने के बाद, खरीदी केंद्रों के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। 
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जिला मुख्यालय के आसपास के करीब दर्जनों धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान लगभग सभी खरीदी केंद्रों में धान जाम की तस्वीर नजर आई। एक तरफ जहां धान का उठाव नहीं होने से समिति प्रभारी और किसान चिंतित है। वही शासकीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक 182 खरीदी केंद्रों के माध्यम से 5 लाख 75 हजार 019 मिट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। जिसमें से केवल एक लाख 39 हर 117 मिट्रिक टन धान  का उठाव किया गया है। शेष 4 लाख 35 हजार 902 मीट्रिक टन यानी 40 लाख 35 हजार क्विंटल से अधिक धान समितियों में जाम की स्थिति में है। जिसका उठाव करने के लिए मार्कफेड के अधिकारी अपना ही राग अलापते तर्क देते नजर आ रहे हैं। 

महासमुंद जिले में इस वर्ष समर्थन मूल्य में धान बेचने के लिए 1 लाख 59 हजार 632 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। जिसमें से 92 हजार 050 किसानों ने अपना धान समर्थन मूल्य में बेचा है। शेष किसान धान बेचने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यदि त्वरित धान का उठाव समितियों से नहीं किया जाता है तो आने वाले सप्ताह भर में समितियां में धान की खरीदी रोकनी पड़ सकती है। जिससे धान खरीदी पर संकट गहरा जाएगा।
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