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Raipur News: आठ साल पुराने रिश्वत मामले में बड़ा फैसला, पूर्व सीएमओ और सब इंजीनियर को तीन साल की सजा

अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sun, 01 Feb 2026 02:13 PM IST
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सार

ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत ने नगर पंचायत के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अनिल शर्मा और सब इंजीनियर सुरेश चंद्र गुप्ता को रिश्वतखोरी का दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

Major decision in eight-year-old bribery case, former CMO and sub-engineer sentenced to 3 years imprisonment
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रायपुर जिले के अभनपुर नगर पंचायत से जुड़े एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में अदालत ने आठ साल बाद सख्त फैसला सुनाया है। ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत ने नगर पंचायत के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अनिल शर्मा और सब इंजीनियर सुरेश चंद्र गुप्ता को रिश्वतखोरी का दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर की अदालत में हुई।
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अदालत में चली सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी माना गया। विशेष लोक अभियोजक विपुल नायक ने बताया कि यह मामला वर्ष 2018 का है, जब एंटी करप्शन ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था। यह ट्रैप 31 दिसंबर 2018 को किया गया था, जिसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा।
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मामले की शुरुआत जेपी कंस्ट्रक्शन के संचालक जय प्रकाश गिलहरे की शिकायत से हुई थी। उन्होंने एसीबी को बताया था कि अभनपुर नगर पंचायत में कराए गए निर्माण कार्य के बकाया भुगतान के बदले उनसे रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के अनुसार तत्कालीन सीएमओ और सब इंजीनियर ने मिलकर 40 हजार रुपये की मांग की थी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जय प्रकाश गिलहरे ने अभनपुर में करीब 55 लाख 55 हजार रुपये की लागत से पुष्प वाटिका निर्माण का ठेका लिया था। काम पूरा होने के बाद पहली किस्त के रूप में लगभग 19 लाख 66 हजार रुपये का भुगतान किया जाना था। इस भुगतान के लिए पहले ही सीएमओ अनिल शर्मा को एक लाख रुपये रिश्वत के तौर पर दिए जा चुके थे।

इसके बावजूद शेष भुगतान जारी करने के लिए दोबारा रिश्वत मांगी गई। सीएमओ ने यह कहते हुए अतिरिक्त 40 हजार रुपये की मांग की कि इस रकम का हिस्सा नगर पंचायत अध्यक्ष को भी देना होगा। बार-बार की मांग से परेशान होकर ठेकेदार ने एसीबी का रुख किया। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाया और दोनों अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
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