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वादों के भंवर में फंसे किसान: 10 साल बाद भी राजस्व में दर्ज नहीं हुआ इन गावों का नाम, अधूरी मूलभूत जरूरतें
अमर उजाला नेटवर्क, बालौदा बाजार
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 03 Apr 2025 04:02 PM IST
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सार
बारनयापारा अभ्यारण्य क्षेत्र के वन ग्राम रामसागर पारा, श्रीरामपुर और लाटादादर से जिले में विस्थापित किसान वर्षों से अपनी समस्या और परेशानी को लेकर कलेक्टर और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। 10 साल बाद भी इन किसानों की समस्या जस की तस है और प्रशासनिक अधिकारी इस ओर सुध तक नहीं ले रहे हैं।
ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बलौदा बाजार जिले के बारनयापारा अभ्यारण्य क्षेत्र के वन ग्राम रामसागर पारा, श्रीरामपुर और लाटादादर से जिले में विस्थापित किसान सालों से अपनी समस्या और परेशानी को लेकर कलेक्टर और प्रशासन से गुहार लगा रहे है। 10 साल बाद भी इन किसानों की समस्या जस की तस है और प्रशासनिक अधिकारी इस ओर सुध तक नहीं ले रहे। इन वन ग्रामों के ग्रामीणों को जिला महासमुंद में साल 2013-14 में विस्थापित कर बसाया गया था।
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तत्कालीन सरकर ने तब इन ग्रामवासियों से मूलभूत जरूरतों, रोटी, कपड़ा और मकान के साथ खेती किसानी के सारे संसाधन देने का वादा किया। आज दस वर्ष से ज्यादा समय में सरकारें तो बदल गईं, लेकिन आज भी मूलभूत जरूरतें तो छोड़िये, आज तक ये गांव रास्स्व रिकॉर्ड में दर्ज तक नहीं किया गया। ऑनलाइन रिकॉर्ड में इन गांवों को नहीं दर्शाने की वजह से ग्रामवासियों को न तो किसान क्रेडिट कार्ड बन पा रहा है और न ही यहां के किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच पा रहे हैं।
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विस्थापित ग्राम के इन ग्रामीणों का राजस्व दुरुस्त नहीं होने के कारण इनके परिवार के बच्चों के पढ़ाई तक की एक बड़ी समस्या है। इसके अलावा जमीन का खसरा नक्शा, आय, जाति, निवास जैसे कागजात भी राज्सव रिकार्ड में दर्ज नही होने की वजह से नहीं बन पा रहा है। किसान कर्ज लेना चाहता है, लेकिन इन किसानों को कोई बैंक कागजात की वजह से स्वीकार नही कर पा रहा है। ऐसे में किसान बीते दस सालों में अनेक बार प्रशासन के चौखट पर माथा रगड़ चुके हैं, लेकिन आजतक इनकी समस्या का समाधान नही हो पाया।
बहरहाल एक बार फिर ग्रामीण किसानों को महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने आश्वासन दिया है कि इन गांवो की समस्या का समाधान जांच कर निपटारा किया जाएगा। साथ ही शासन स्तर पर किये गये वादों के लिये जरूरत पड़ी तो पत्राचार कर समस्या का समाधान किया जाएगा। अब देखना यह है कि वर्षों तक सरकार बदलते देखने वाले इन किसानों की समस्या की तस्वीर कब बदलेगी।