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पद्म सम्मान की घोषणा: छत्तीसगढ़ के बुधरी ताटी, डॉ. रामचंद्र और संगीता गोडबोले चयनित
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 25 Jan 2026 04:47 PM IST
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सार
केंद्र सरकार ने वर्ष के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व का अवसर है, क्योंकि राज्य से तीन लोगों का चयन पद्म सम्मान के लिए किया गया है। पद्म पुरस्कार पाने वालों में बुधरी ताटी, डॉ. रामचंद्र गोडबोले और संगीता गोडबोले के नाम शामिल हैं।
समाजसेविका बुधरी ताती और डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार ने वर्ष के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व का अवसर है, क्योंकि राज्य से तीन लोगों का चयन पद्म सम्मान के लिए किया गया है। बस्तर जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाके में वर्षों से निस्वार्थ सेवा कर रहे तीन लोगों को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है। इनमें समाजसेविका बुधरी ताती और चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले व सुनीता गोडबोले शामिल हैं।
बस्तर की 'बड़ी दीदी' बुधरी ताती
दक्षिण बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र में रहने वाली बुधरी ताती पिछले करीब चार दशक से समाजसेवा में जुटी हैं। उन्होंने अपना जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बुजुर्गों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। बुधरी ताती ने सिलाई प्रशिक्षण, शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए अब तक 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। कठिन परिस्थितियों, नक्सल प्रभाव और संसाधनों की कमी के बावजूद उनका सेवा कार्य कभी नहीं रुका। स्थानीय लोग उन्हें सम्मान से 'बड़ी दीदी' कहकर पुकारते हैं।
दुर्गम इलाकों में मुफ्त इलाज दे रहे डॉ. गोडबोले
डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम आदिवासी इलाकों में मुफ्त चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। वे एक आयुर्वेद चिकित्सक हैं और अपनी पत्नी सुनीता गोडबोले के साथ मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता और कुपोषण के खिलाफ लगातार काम कर रहे हैं।
दोनों ने मिलकर 'ट्रस्ट फॉर हेल्थ' के माध्यम से ऐसे गांवों तक इलाज पहुंचाया, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क तक नहीं है। वे खुद पैदल और साधनों के सहारे इन इलाकों में जाकर स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं और मरीजों का इलाज करते हैं। उनके इस समर्पण के लिए उन्हें पहले स्वामी विवेकानंद अवॉर्ड 2026 से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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बस्तर की 'बड़ी दीदी' बुधरी ताती
दक्षिण बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र में रहने वाली बुधरी ताती पिछले करीब चार दशक से समाजसेवा में जुटी हैं। उन्होंने अपना जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बुजुर्गों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। बुधरी ताती ने सिलाई प्रशिक्षण, शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए अब तक 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। कठिन परिस्थितियों, नक्सल प्रभाव और संसाधनों की कमी के बावजूद उनका सेवा कार्य कभी नहीं रुका। स्थानीय लोग उन्हें सम्मान से 'बड़ी दीदी' कहकर पुकारते हैं।
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दुर्गम इलाकों में मुफ्त इलाज दे रहे डॉ. गोडबोले
डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम आदिवासी इलाकों में मुफ्त चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। वे एक आयुर्वेद चिकित्सक हैं और अपनी पत्नी सुनीता गोडबोले के साथ मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता और कुपोषण के खिलाफ लगातार काम कर रहे हैं।
दोनों ने मिलकर 'ट्रस्ट फॉर हेल्थ' के माध्यम से ऐसे गांवों तक इलाज पहुंचाया, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क तक नहीं है। वे खुद पैदल और साधनों के सहारे इन इलाकों में जाकर स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं और मरीजों का इलाज करते हैं। उनके इस समर्पण के लिए उन्हें पहले स्वामी विवेकानंद अवॉर्ड 2026 से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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