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रायपुर साहित्य उत्सव का समापन: राज्यपाल बोले- डिजिटल दौर में भी किताबों और साहित्य की अहमियत बरकरार
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 25 Jan 2026 08:18 PM IST
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सार
राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम हैं। जैसे संगीत के सात स्वर लोगों को जोड़ते हैं, वैसे ही साहित्य विचारों के आदान-प्रदान से सीखने का अवसर देता है।
रायपुर साहित्य उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 'आदि से अनादि' के समापन समारोह शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल दौर के बावजूद प्रिंट मीडिया और साहित्य का महत्व कभी खत्म नहीं होगा।
राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम हैं। जैसे संगीत के सात स्वर लोगों को जोड़ते हैं, वैसे ही साहित्य विचारों के आदान-प्रदान से सीखने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें सोचने की नई दृष्टि देता है और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
राज्यपाल ने उत्सव के तीन दिनों के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच पर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई अहम विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ और देशभर से आए प्रकाशकों ने किताबों का बेहतरीन संग्रह प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि देखना सुखद है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्य उत्सव लगातार होने चाहिए और इन्हें सिर्फ सरकारी आयोजन न बनाकर समाज की भागीदारी से गांव और छोटे शहरों तक पहुंचाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने चिंता जताई कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ की रामायणकालीन संस्कृति और साहित्य से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रचार जरूरी है ताकि देश-दुनिया इसे जान सके।
राज्यपाल ने कहा कि शब्दों में बहुत ताकत होती है। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल दो शब्दों ने पूरे देश को जागृत कर दिया था। उन्होंने लोगों से अपील की कि जीवन में कम से कम एक ऐसा काम जरूर करें, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज और देश के लिए हो। समापन समारोह में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से साहित्य की धारा से जुड़ी रही है और आगे भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रंगकर्मी और नाट्य लेखक सच्चिदानंद जोशी ने की।
इस मौके पर फिल्म अभिनेता और निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता अनुराग बसु, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, आर. कृष्णा दास, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम हैं। जैसे संगीत के सात स्वर लोगों को जोड़ते हैं, वैसे ही साहित्य विचारों के आदान-प्रदान से सीखने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें सोचने की नई दृष्टि देता है और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
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राज्यपाल ने उत्सव के तीन दिनों के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच पर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई अहम विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ और देशभर से आए प्रकाशकों ने किताबों का बेहतरीन संग्रह प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि देखना सुखद है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्य उत्सव लगातार होने चाहिए और इन्हें सिर्फ सरकारी आयोजन न बनाकर समाज की भागीदारी से गांव और छोटे शहरों तक पहुंचाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने चिंता जताई कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ की रामायणकालीन संस्कृति और साहित्य से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रचार जरूरी है ताकि देश-दुनिया इसे जान सके।
राज्यपाल ने कहा कि शब्दों में बहुत ताकत होती है। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल दो शब्दों ने पूरे देश को जागृत कर दिया था। उन्होंने लोगों से अपील की कि जीवन में कम से कम एक ऐसा काम जरूर करें, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज और देश के लिए हो। समापन समारोह में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से साहित्य की धारा से जुड़ी रही है और आगे भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रंगकर्मी और नाट्य लेखक सच्चिदानंद जोशी ने की।
इस मौके पर फिल्म अभिनेता और निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता अनुराग बसु, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, आर. कृष्णा दास, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।