{"_id":"69f3505dc5bbd5f9c90948f7","slug":"a-unique-treatment-using-banana-leaves-a-rare-disease-was-overcome-at-the-sncu-read-the-full-story-2026-04-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"25 दिन की जंग के बाद जीत: केले के पत्तों से खास इलाज, SNCU में दुर्लभ बीमारी पर जीत; पढ़ें पूरी खबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
25 दिन की जंग के बाद जीत: केले के पत्तों से खास इलाज, SNCU में दुर्लभ बीमारी पर जीत; पढ़ें पूरी खबर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 30 Apr 2026 06:21 PM IST
विज्ञापन
सार
छत्तीसगढ़ के सुदूर बीजापुर जिले में एक नवजात शिशु को गंभीर और दुर्लभ बीमारी से बचाकर डॉक्टरों ने बड़ी सफलता हासिल की है। जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में 25 दिनों तक चले इलाज के बाद शिशु को स्वस्थ किया गया।
SNCU में दुर्लभ बीमारी पर जीत
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
छत्तीसगढ़ के सुदूर बीजापुर जिले में एक नवजात शिशु को गंभीर और दुर्लभ बीमारी से बचाकर डॉक्टरों ने बड़ी सफलता हासिल की है। जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में 25 दिनों तक चले इलाज के बाद शिशु को स्वस्थ किया गया।
जानकारी के अनुसार, उसूर विकासखंड के कोरसागुड़ा गांव की एक नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में बच्चे को स्टैफिलोकोकल स्केल्डेड स्किन सिंड्रोम जैसी दुर्लभ त्वचा बीमारी से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
केले के पत्तों से दी गई विशेष देखभाल
उपचार के दौरान डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक उपायों का भी सहारा लिया। शिशु की नाजुक त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग बिस्तर के रूप में किया गया, जिससे घर्षण कम हुआ और संक्रमण से बचाव संभव हो सका।
25 दिन तक चला गहन उपचार
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने एंटीबायोटिक थेरेपी और विशेष नर्सिंग के जरिए लगातार निगरानी रखी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन के मार्गदर्शन में यह इलाज सफल रहा।
परिजनों ने जताया आभार
बच्चे के परिजनों ने कहा कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण से उनका बच्चा अब स्वस्थ है। उन्होंने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया। इस सफलता ने यह साबित किया है कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं और बीजापुर का जिला अस्पताल गंभीर मामलों के इलाज में सक्षम बन रहा है।
Trending Videos
जानकारी के अनुसार, उसूर विकासखंड के कोरसागुड़ा गांव की एक नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में बच्चे को स्टैफिलोकोकल स्केल्डेड स्किन सिंड्रोम जैसी दुर्लभ त्वचा बीमारी से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
केले के पत्तों से दी गई विशेष देखभाल
उपचार के दौरान डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक उपायों का भी सहारा लिया। शिशु की नाजुक त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग बिस्तर के रूप में किया गया, जिससे घर्षण कम हुआ और संक्रमण से बचाव संभव हो सका।
25 दिन तक चला गहन उपचार
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने एंटीबायोटिक थेरेपी और विशेष नर्सिंग के जरिए लगातार निगरानी रखी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन के मार्गदर्शन में यह इलाज सफल रहा।
परिजनों ने जताया आभार
बच्चे के परिजनों ने कहा कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण से उनका बच्चा अब स्वस्थ है। उन्होंने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया। इस सफलता ने यह साबित किया है कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं और बीजापुर का जिला अस्पताल गंभीर मामलों के इलाज में सक्षम बन रहा है।
