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CG News: छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ नगर और ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 19 Mar 2026 06:42 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विधानसभा ने नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विधानसभा ने नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य शहरों के अनियंत्रित विस्तार पर रोक लगाना और योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देना है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा पेश किए गए इस संशोधन विधेयक पर सदन में चर्चा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन का दायित्व सीमित एजेंसियों तक ही केंद्रित है। इसके चलते कई शहरों में अव्यवस्थित विकास और अवैध प्लॉटिंग की समस्या बढ़ी है।
सरकार का मानना है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर यदि विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो शहरी विकास को अधिक गति दी जा सकती है। इसी उद्देश्य से कानून में संशोधन करते हुए अब नगर विकास योजनाएं तैयार करने के लिए अधिकृत संस्थाओं के दायरे का विस्तार किया गया है।
नए प्रावधान के तहत अब केवल विकास प्राधिकरण ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के अन्य अभिकरण और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां भी नगर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भाग ले सकेंगी। इससे न केवल योजनाओं की संख्या बढ़ेगी, बल्कि औद्योगिक और आवासीय विकास को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अवैध प्लॉटिंग पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और नागरिकों को बेहतर सुविधाओं के साथ व्यवस्थित भूखंड उपलब्ध हो पाएंगे। साथ ही, बुनियादी ढांचे के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
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वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा पेश किए गए इस संशोधन विधेयक पर सदन में चर्चा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन का दायित्व सीमित एजेंसियों तक ही केंद्रित है। इसके चलते कई शहरों में अव्यवस्थित विकास और अवैध प्लॉटिंग की समस्या बढ़ी है।
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सरकार का मानना है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर यदि विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो शहरी विकास को अधिक गति दी जा सकती है। इसी उद्देश्य से कानून में संशोधन करते हुए अब नगर विकास योजनाएं तैयार करने के लिए अधिकृत संस्थाओं के दायरे का विस्तार किया गया है।
नए प्रावधान के तहत अब केवल विकास प्राधिकरण ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के अन्य अभिकरण और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां भी नगर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भाग ले सकेंगी। इससे न केवल योजनाओं की संख्या बढ़ेगी, बल्कि औद्योगिक और आवासीय विकास को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अवैध प्लॉटिंग पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और नागरिकों को बेहतर सुविधाओं के साथ व्यवस्थित भूखंड उपलब्ध हो पाएंगे। साथ ही, बुनियादी ढांचे के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।