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भारत माला घोटाले में बड़ा एक्शन: फरार तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी गिरफ्तार, करोड़ों के खेल की जांच तेज
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 18 Mar 2026 02:03 PM IST
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सार
भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से फरार चल रहे अभनपुर के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) और भूमि अर्जन के सक्षम प्राधिकारी निर्भय कुमार साहू को आखिरकार जांच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया है।
फरार तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से फरार चल रहे अभनपुर के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) और भूमि अर्जन के सक्षम प्राधिकारी निर्भय कुमार साहू को आखिरकार जांच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल घोटाले की जांच एक नए चरण में प्रवेश कर गई है।
यह घोटाला रायपुर-विशाखापट्नम कॉरिडोर और दुर्ग बायपास के तहत चल रही भारतमाला परियोजना से जुड़ा है। आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर फर्जी तरीके से मुआवजा राशि बांटी गई। इस मामले में निर्भय कुमार साहू समेत कई लोगों ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और जमीन कारोबारियों के साथ मिलकर जमीन को बैकडेट में छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया। इससे पात्र लोगों को मिलने वाले मुआवजे से कई गुना अधिक राशि जारी कर दी गई।
इतना ही नहीं, पहले से अधिग्रहित जमीन को भी दोबारा अधिग्रहण दिखाकर मुआवजा निकाल लिया गया। इस सुनियोजित गड़बड़ी से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका भी लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ स्थायी वारंट और उद्घोषणा जारी की गई थी, बावजूद इसके वह फरार चल रहा था।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 17 से 30 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगालने में जुटी हैं।
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यह घोटाला रायपुर-विशाखापट्नम कॉरिडोर और दुर्ग बायपास के तहत चल रही भारतमाला परियोजना से जुड़ा है। आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर फर्जी तरीके से मुआवजा राशि बांटी गई। इस मामले में निर्भय कुमार साहू समेत कई लोगों ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
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जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और जमीन कारोबारियों के साथ मिलकर जमीन को बैकडेट में छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया। इससे पात्र लोगों को मिलने वाले मुआवजे से कई गुना अधिक राशि जारी कर दी गई।
इतना ही नहीं, पहले से अधिग्रहित जमीन को भी दोबारा अधिग्रहण दिखाकर मुआवजा निकाल लिया गया। इस सुनियोजित गड़बड़ी से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका भी लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ स्थायी वारंट और उद्घोषणा जारी की गई थी, बावजूद इसके वह फरार चल रहा था।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 17 से 30 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगालने में जुटी हैं।