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Chhattisgarh News: आरटीई नियमों की अनदेखी पर सख्ती, प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता होगी रद्द
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 07 Apr 2026 04:53 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के पालन को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। साफ किया गया है कि आरटीई के तहत पात्र बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करना भी शामिल है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के पालन को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। साफ किया गया है कि आरटीई के तहत पात्र बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करना भी शामिल है।
राज्य में वर्ष 2010 से लागू आरटीई कानून के तहत निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के आधार पर प्रवेश दिया जाता है।
सरकार की ओर से निजी स्कूलों को प्रति छात्र व्यय के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि भी दी जाती है। यह राशि सरकारी स्कूलों में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या संबंधित निजी स्कूल की फीस—दोनों में से जो कम हो—उस आधार पर तय की जाती है।
राज्य में वर्तमान में कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र 7,000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति दी जाती है। यह राशि कई पड़ोसी राज्यों के मुकाबले बेहतर या बराबरी की मानी जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश के 6,800 से अधिक निजी स्कूलों में करीब 3.6 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। चालू शैक्षणिक सत्र में भी हजारों सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी निजी स्कूलों के लिए आरटीई के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे इस विषय में फैल रही अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
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राज्य में वर्ष 2010 से लागू आरटीई कानून के तहत निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के आधार पर प्रवेश दिया जाता है।
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सरकार की ओर से निजी स्कूलों को प्रति छात्र व्यय के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि भी दी जाती है। यह राशि सरकारी स्कूलों में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या संबंधित निजी स्कूल की फीस—दोनों में से जो कम हो—उस आधार पर तय की जाती है।
राज्य में वर्तमान में कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र 7,000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति दी जाती है। यह राशि कई पड़ोसी राज्यों के मुकाबले बेहतर या बराबरी की मानी जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश के 6,800 से अधिक निजी स्कूलों में करीब 3.6 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। चालू शैक्षणिक सत्र में भी हजारों सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी निजी स्कूलों के लिए आरटीई के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे इस विषय में फैल रही अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।