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Ambikapur: यास्मीन ने मास्टरशेफ में छत्तीसगढ़ की खाद्य विरासत को पहुंचाया वैश्विक मंच पर, जजेस भी हुए प्रभावित
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
Published by: Akash Dubey
Updated Thu, 26 Mar 2026 07:18 PM IST
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सार
यास्मीन अंसारी की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय खाद्य संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है। उनकी सफलता आज युवाओं और गृहिणियों के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही है।
यास्मीन अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ की यास्मीन अंसारी ने राष्ट्रीय कुकिंग शो मास्टरशेफ में अपनी पहचान बनाई है। एक साधारण गृहिणी से होम शेफ बनीं यास्मीन अपनी रचनात्मकता और अनोखे स्वाद के कारण चर्चा में हैं। वह अपनी डिश में जनजातीय सामग्री का अभिनव प्रयोग करती हैं।
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यह विशेषता उन्हें प्रतियोगिता में अन्य प्रतिभागियों से अलग बनाती है। उनकी मास्टरशेफ यात्रा नवंबर 2025 में शुरू हुई, जब उन्हें शो की टीम से दोबारा मौका मिला। हैदराबाद और मुंबई में हुए ऑडिशन के विभिन्न चरणों को उन्होंने पार किया। मूल रूप से छत्तीसगढ़ की रहने वाली और वर्तमान में बेंगलूरू में निवासरत यास्मीन ने अपने हुनर से जजेस को प्रभावित किया। फाइनल मेगा ऑडिशन में उन्होंने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तत्वों को अंतरराष्ट्रीय शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने एक जटिल और आकर्षक डिश तैयार की।
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मिशेलिन स्तर की डिश
उनकी डिश में बकवीट फिलो पेस्ट्री, महुआ जैम, लकड़ा फूल का सोरबे, गोभी पन्ना कोटा, पलाश फ्लावर एलिमेंट और रेड ऐंट तकनीक जैसी आधुनिक कुकिंग विधियां शामिल थीं। स्वाद, प्रस्तुति और तकनीक के बेहतरीन संतुलन के कारण जजेस ने इसे "मिशेलिन स्तर" का बताया। जजेस ने यास्मीन और उनके भाई महफूज को मास्टरशेफ का प्रतिष्ठित एप्रन प्रदान किया। जजेस ने उनके दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि अब समय 'ट्राइबल टू ग्लोबल' का है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय खाद्य संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।